जसूर(कांगड़ा)। पौंग बांध विस्थापितों को राजस्थान में अलॉट किए गए मुरब्बे अर्थात भूखंड को कुछ शातिर लोगों ने वहां के राजस्व कर्मियों की कथित मिलीभगत से अपने नाम करवा कर मालिक बनने का मामला सामने आया है।
जसूर निवासी शांति स्वरूप, केवल कुमार, सुरेंद्र कुमार इत्यादि ने हिमाचल सरकार और प्रधानमंत्री को भेजी एक लिखित शिकायत में कहा है कि 1970 के दशक में पौंग बांध के अस्तित्व में आने पर उन्हें राजस्थान के गंगानगर जिला की विजय नगर तहसील में गांव 7 बीडीजी में 161/382 नंबर का कमांड मुरब्बा अलाट हुआ था। उनके पिता अमीर चंद ने इस मुरब्बे की दो किस्तें नियमानुसार जमा करवाई, तो इस मुरब्बे को गैर सिंचित यानी अनकमांड घोषित कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने भी इसकी किस्तें देना जारी रखा और संत यंत्र से 1992 तक विधिवत रूप इस भूखंड की सभी किस्तें भरीं। इसी बीच 1996 में उनके पिता का देहांत हो गया। इस मुरब्बे में सिंचाई सुविधा के अभाव के कारण उनका इस स्थान से संपर्क कम होता गया। इसी दौरान एक सुनियोजित योजना के तहत इस मुरब्बे को खाली देख इसे धोखे से जोगिंद्र पाल निवासी विजयनगर ने अपने नाम करवा लिया। इस प्रकरण में महेंद्र और शांति स्वरूप को वारिस दिखा कर यह कारनामा किया गया। प्रदेश सरकार और प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में पीड़ितों ने गुहार लगाई है कि उनके साथ हुई इस जालसाजी की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए और दोषियों के खिलाफ उचित दंड दिलाकर उनके मुरब्बे को वापस दिलाया जाए।