रितेश महाजन
नूरपुर(कांगड़ा)। प्रदेश के 13वें मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर की कैबिनेट में मंत्री पद हासिल करने की अंदरखाते चल रही सियासी करसत में भाजपा के संगठनात्मक जिला नूरपुर की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। प्रदेश के सबसे बड़े कांगड़ा जिला को संगठनात्मक दृष्टि से नूरपुर, पालमपुर, कांगडा और देहरा चार संगठनात्मक जिलों में बांटा गया है, इनमें से कांगड़ा जिला से शाहपुर विस क्षेत्र की नवनिर्वाचित विधायक सरवीण चौधरी, धर्मशाला से किशन कपूर, पालमपुर जिला में सुलह से विपिन परमार और जसवां परागपुर से विक्रम ठाकुर को प्रदेश मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया गया है, जबकि जिला कांगड़ा की राजनीति में अहम स्थान रखने वाले नूरपुर जिला की झोली खाली रहने से मायूसी छा गई है। हालांकि, जहां पिछली कांग्रेस सरकार में फतेहपुर विस क्षेत्र से वरिष्ठ राजपूत नेता सुजान सिंह पठानिया को वीरभद्र सिंह से वफादारी के इनाम के तौर पर कैबिनेट मंत्री पद से नवाजा गया था तो वहीं, ओबीसी बाहुल्य जिला कांगड़ा में जवाली हलके से लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचने वाले नीरज भारती भी जातीय समीकरणों के बीच अपने पिता पूर्व सांसद चौधरी चंद्र कुमार के रसूख और वीरभद्र सिंह से नजदीकियों के चलते मुख्य संसदीय सचिव का पद झटकने में कामयाब रहे थे। पिछली बार फतेहपुर और जवाली के अलावा नूरपुर सीट कांग्रेस की झोली में गई थी तो इंदौरा (आरक्षित) सीट पर भाजपा के बागी उम्मीदवार मनोहर धीमान ने जीत हासिल की थी। इस बार फतेहपुर हलके को छोड़कर नूरपुर, इंदौरा और जवाली तीनों विस सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। जहां नूरपुर से राकेश पठानिया के बूते करीब 20 साल के लंबे इंतजार के बाद भाजपा का कमल खिल पाया है तो वहीं, जवाली से अर्जुन ठाकुर कांग्रेस के दिग्गज ओबीसी नेता चौधरी चंद्र कुमार को पटकनी देकर पहली मर्तबा विधानसभा पहुंचे है, जबकि इंदौरा विस क्षेत्र से महिला नेत्री रीता धीमान ने भी पहली दफा जीत का स्वाद चखा है। हालांकि, इस बार जयराम कैबिनेट में नूरपुर को भी प्रतिनिधित्व मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही थी। नूरपुर के राजनीतिक इतिहास पर गौर फरमाएं तो 1980 में पहली बार विधायक चुने जाने पर सत महाजन को ठाकुर राम लाल के मंत्रिमंडल में पर्यटन और राजस्व विभाग के अलावा अलग-अलग कार्यकाल के दौरान वीरभद्र सिंह के साथ राजस्व, सिंचाई, परिवहन, पर्यटन और ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभागों का मंत्री बनने का मौका मिला। इतना ही नहीं, वर्ष 1998 में धूमल सरकार में पहली बार भाजपा की टिकट पर विधायक बनने वाले राकेश पठानिया को भी पर्यटन विभाग का चेयरमैन बनाया गया था। पिछले करीब 15 साल से कांग्रेस के फील्ड मार्शल स्व. सत महाजन के बाद से नूरपुर की खाली झोली में इस मर्तबा भी कुछ भी हासिल नहीं होने से लोगों में मायूसी है। कुल मिलाकर प्रदेश मंत्रिमंडल के गठन के बाद अब सबकी नजरें सीपीएस के ओहदे पर टिकी हैं।