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ृषि विवि में अब कुल्थी की नई किस्मों को शुरु होगा शोध

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पालमपुर (कांगड़ा)। कुल्थी फसल के तैयार हुए जीनोम पर अब आने वाले दिनों में कृषि विवि पालमपुर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कब्ज, बवासीर और गुर्दे की पत्थरी के लिए अहम माने जाने वाली कुल्थी अब नई किस्मों की प्रजातियां विकसित हो सकती हैं। जापान के कजूसा पौध जीनोम प्रयोगशाला और कृषि विवि पालमपुर के सहयोग से दो साल के शोध में कुल्थी का
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जीनोम तैयार हुआ है। अब आने वाले दिनों में इसके विभिन्न किस्मों की फसलों पर कृषि विवि शोध करेगा। बताया जाता है कि कई बीमारियों में अपना योगदान करनी वाली कुल्थी की जीनोम पर जानकारियां उपलब्ध नहीं थी। कृषि विवि पालमपुर और जापान के वैज्ञानिकों के आपसी सहयोग से चले इस शोध पर विवि को सफलता मिली है। इसके लिए कभी विवि के वैज्ञानिक तो कभी जापान के वैज्ञानिक कृषि विवि में आते रहे। अब तक हिमाचल की बात करें तो कुल्थी की फसल कई जगहों पर मंझले किसानों की ओर से बंजर भूमि पर ही तैयार की जाती है। इसके लिए कभी कोई कदम नहीं उठाया गया। जबकि यह आम लोगों में भी कुल्थी की दाल को लेकर सीधी अवधारणा रही है कि कुल्थी पत्थरी के मरीज के लिए अच्छी होती है। कृषि विवि की मानें तो यह फसल शुष्क भूमि पर और वीरान पड़े इलाकों में भी उगाई जा सकती है। अब कुल्थी तैयार हुए जीनोम से कृषि विवि के वैज्ञानिक नए शोध कर इसकी नई प्रजातियां तैयार कर सकते हैं, जिससे आने वाले दिनों में विवि के साथ प्रदेश या अन्य प्रदेशों के किसानों को भी लाभ हो सकता है। अब विवि के वैज्ञानिक इसकी नई प्रजातियों के शोध के साथ यह भी देखेंगे कि कौन सी जगह में कौन किस्म तैयार हो सकती है। लिहाजा, 36 हजार जीनों से भरपूर यह कुल्थी के शोध में अब विवि अपनी नई रूपरेखा जल्द तैयार शुरू कर देगा।
कुल्थी के शोध पर विवि करेगा अपना काम : डॉ. हृदय पाल
विवि के संयुक्त निदेशक डा. हृदय पाल सिंह का कहना है कि कुल्थी पर जापान और कृषि विवि के वैज्ञानिकों ने मिल कर जीनोम तैयार किया है। इस पर विवि आगे अपने काम करेगा। कुल्थी के जीनोम तैयार होने पर अब इस पर नई किस्मों की प्रजातियां तैयार हो सकती हैं।
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कृषि विवि के कुलपति प्रो. अशोक सरियाल ने कहा कि कुल्थी पर डा. राकेश कुमार चाहौता, कृषि जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोफैसर डा. टीआर शर्मा और चीबा जापान स्थित कजुसा पौध जीनोम प्रयोगशाला, के अध्यक्ष डा. सचिको ईसोब ने कड़ी मेहनत की। विवि इस पर अब अपने शोध करेगा।
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