अमर उजाला ब्यूरो
पालमपुर (कांगड़ा)। उपमंडलीय सिविल अस्पताल पालमपुर ने एक बार फिर से यह सिद्ध कर दिया है कि किसी अधरंग के मरीज को चार घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो इस मरीज का इलाज हो सकता है। मरीज जल्द चल फिर सकता है। अस्पताल में एक अधरंग से ग्रस्त महिला का सफल इलाज किया गया है।
अधरंग से पीड़ित यह महिला अब सामान्य हो गई है। पपरोला की रहने वाली महिला बनीता (65) को अधरंग (स्ट्रोक) हो गया। इसे परिजन इलाज के लिए जल्द पालमपुर में एक निजी अस्पताल में ले गए। लेकिन, मरीज को देख निजी अस्पताल ने पालमपुर सिविल अस्पताल में रेफर कर दिया। मरीज को अधरंग होने के बाद करीब दो घंटे के अंदर सिविल अस्पताल में लाया गया। इस पर मेडिकल स्पेशलिस्ट चिकित्सक डॉ. प्रेम भारद्वाज ने महिला का थरंबोलाइज किया। इससे महिला आधे घंटे के अंदर हिलना जुलना शुरू हो गई और वह 24 घंटे अंदर महिला ठीक बताई गई है। अस्पताल में इससे पहले 18 अधरंग के मरीजों का इलाज किया जा चुका है। डॉ. प्रेम भारद्वाज ने कहा कि अधरंग के मरीज को चार घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचाया जाए तो मरीज थरंबोलाइज से ठीक किया जा सकता है।
क्या है थरंबोलाइज
यह एक विशेष प्रकार का ब्लॉकेज को खोलने का इंजेक्शन होता है। इसमें सबसे पहले सीटी स्कैन से यह पता लगाया जाता है कि दिमाग की नस कहां पर ब्लॉक है। उसे यह इंजेक्शन (थरंबोलाइज) लगाया जाता है। इसकी लागत करीब 75 हजार के करीब है। लेकिन, सरकार की ओर से यह मुफ्त लगाया जाता है। डॉ. भारद्वाज ने कहा कि यह चार घंटे के अंदर ही लगाया जा सकता है।
18 मरीज हो चुके हैं ठीक : एमएस
अस्पताल के एमएस डॉ. विनय महाजन ने कहा कि अस्पताल में अब तक थरंबोलाइज से 18 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। यह इलाज मुफ्त किया जाता है, जबकि अस्पताल में इसके लिए आपातकालीन व्यवस्था का इंतजाम है।