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कांगड़ा अस्पताल के गेट नहीं खोले, तीमारदार ने सड़क पर लगाई गाड़ी

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मरीज की गाड़ी के लिए नहीं खोला अस्पताल का गेट
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तीमारदार ने मां का इलाज करवाने के बाद व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
कांगड़ा। दोपहर बाद शहर में चले अंधड़ के बाद हुई बरसात में बंदर के काटने के बाद अफरातफरी में अपनी माता को इलाज के लिए कांगड़ा निवासी की गाड़ी अस्पताल के भीतर ही नहीं जाने दी। सुरक्षाकर्मियों ने मरीज की गाड़ी को अंदर ले जाने के लिए गेट ही नहीं खोले। ऐसे में बंदर के काटने के बाद पड़े जख्मों से इंफेक्शन ज्यादा फैलने के डर से उन्होंने चालान किए जाने की परवाह किए बिना मुख्य सड़क किनारे गाड़ी लगाई और अपनी घायल माता को उपचार के लिए भीतर लेकर गए। शहरवासी मनमोहन शर्मा कांगड़ा अस्पताल की अव्यवस्थाओं पर बेहद खिन्न दिखे। उन्होंने कहा कि यह तो अजीब मजाक है। सुरक्षाकर्मियों ने अस्पताल के गेट ऐसे बंद कर रखें हैं जैसे यह उनका अपना घर हो। गेट बंद कर आराम से कुर्सी पर बैठे हैं। तीमारदार गाड़ी में अपने मरीज को लेकर भीतर कैसे जाए। इस अव्यवस्था और उन्हें हुई परेशानी की शिकायत वे मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से करेंगे ताकि और कोई तीमारदार भविष्य में परेशान न हो। इंटक नेता रमेश सैनी ने कहा कि एक तो ऐसे ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के चलते कांगड़ा अस्पताल में आ रहे मरीजों को परेशानी होती है। ऊपर से ऐसी अव्यवस्थाएं तीमारदार और मरीजों को और ज्यादा परेशान करती हैं।
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इस संबध में अस्पताल में एसएमओ का कार्यभार देख रहे डॉ. अंकुश कपूर ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। इस मामले में वे सुरक्षाकर्मियों से पूछताछ करेंगे। कांगड़ा अस्पताल में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि तीमारदार अपने मरीज को भीतर गाड़ी में नहीं ले जा सकते हैं।
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