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छह माह की बच्ची को लेकर पति की सलामती के लिए ठोकरें खा रही रीमा

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विनोद राणा
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पालमपुर(कांगड़ा)। नाइजीरिया में फंसे दो हिमाचली युवकों की परिजनों में इस बात को लेकर भारी दुख है कि भारत सरकार पाकिस्तान के लोगों की मदद के लिए तो अपने हाथ आगे बढ़ा देती है। लेकिन अपने ही देश के युवकों को छुड़ाने के लिए शायद अपनी ही भारत सरकार के पास वक्त नहीं है।अपनी छह माह की बच्ची रुसाली को गोद में उठाए चीफ ऑफिसर सुधीर की पत्नी रीमा कुमारी पति की रिहाई के लिए जगह-जगह ठोकरें खा रही है। युवकों के परिजनों का कहना है कि वे डेढ़ माह से भारत सरकार के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अभी तक इस भारत सरकार ने इस ओर कोई कदम तक नहीं बढ़ाया है। यह देख युवकों के परिजनों में रोष के साथ अफसोस भी है।
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अब तक भारत सरकार की ओर से कोई कदम न उठाने से इन युवकों के परिजनों में आशा की लौ कम होने लगी है। लिहाजा, अब हार थक कर परिजनों ने सांसद शांता कुमार से मुलाकात की। साथ ही इन लोगों ने पीएमओ कार्यालय में भाजपा प्रत्याशी इंदु गोस्वामी की अच्छी पहुंच होने के कारण उनसे भी मुलाकात की है। रीमा का पति तो जहाज में दुख झेल ही रहा है, लेकिन यह परिवार भी उनकी जुदाई में बेचैन है, जबकि कैप्टन अतुल शर्मा के परिजनों का भी यह हाल है। अतुल के भाई अमन और सुधीर के पत्नी रीमा ने कहा कि भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पाकिस्तान के लोगों के लिए मदद का हाथ तो बढ़ा देती हैं, लेकिन, अपने ही लोगों की क्यों बेरुखी हो रही है। वे इस मामले में क्यों मदद नहीं करती हैं। इनका कहना है कि जब मामला 2012 का है तो इन लोगों का क्या कसूर है और इन लोगों को क्यों पकड़ रखा है। इस मामले में भारत सरकार को जल्द कदम उठाना चाहिए।
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