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शाहपुर में सरवीण का किला तोड़ने में मेजर-केवल नाकाम

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विक्रम मेहरा
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लंज (कांगड़ा)। शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में 2007 से सरवीण चौधरी का वर्चस्व तोड़ने में कांग्रेस और मेजर विजय सिंह मनकोटिया नाकाम रहे। वर्ष 2007 विधानसभा चुनावों में जहां सरवीण चौधरी ने 25,175 वोट लेकर अपना वर्चस्व स्थापित किया था उसे 2017 चुनावों तक कोई नहीं तोड़ पाया।
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2007 में केवल सिंह पठानिया को 7225 वोट प्राप्त हुए थे। उनमें पिछले दस साल में पठानिया ने 8108 मतों का इजाफा जरूर किया, क्योंकि केवल ने इस बार के चुनाव कुल 16,333 मत प्राप्त किए। मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने 2007 में अपना चुनाव क्षेत्र बदल लिया था पर उन्होंने अपना समर्थन बहुजन समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ओंकार राणा को दिया था। जिन्होंने 2007 के चुनावों में कुल 16,143 मत प्राप्त किए थे और 2012 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में एक बार फिर शाहपुर से चुनाव लड़ा। जिसमें उन्हें 22,346 मत मिले थे। इस बार के विधानसभा चुनाव मेजर ने फिर शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से आजाद प्रत्याशी के रूप में लड़कर 16,957 मत प्राप्त किए। मनकोटिया 2007 से 2017 तक अपने मतों की संख्या में मात्र 814 मतों की बढ़ोतरी की है। वर्ष 2012 चुनावों में जो 22,364 मत मिले थे उनमें से अगर कांग्रेस के 5400 वोट निकाल दिए जाएं तो वोटों की संख्या फिर 16 हजार वोटों तक ही सीमित रह जाती है। सरवीण चौधरी ने जहां 2007 में 25,175 और 2012 विधानसभा चुनावों सरवीण चौधरी के वोटों की संख्या में इजाफा हुआ ओर वोटों की संख्या 25487 तक पहुंच गई। इन विधानसभा चुनावों में सरवीण चौधरी के वोटों की संख्या 23104 रह गई और जो लगभग 2000 वोटों की कमी आई है। कुल मिलाकर देखा जाए तो 2007 से 2017 के चुनावों तक सरवीण के वर्चस्व को दोनों प्रत्याशी तोड़ने में नाकाम साबित हुए हैं।
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