जसूर (कांगड़ा)। पठानकोट-मंडी फोरलेन के लिए काटे गए पेड़ों की भरपाई के लिए वन विभाग ने नूरपुर वन मंडल में वर्ष 2024 और 2025 के दौरान करीब 1.17 लाख पौधे रोपे हैं।
मानसून सीजन में 107 हेक्टेयर सरकारी वन भूमि पर औषधीय और अन्य प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। यह पौधरोपण नूरपुर वन मंडल की कोटला, जवाली, नूरपुर और रे वन रेंज में किया गया।
कोटला में 25 हेक्टेयर, जवाली में 35 हेक्टेयर, नूरपुर में 22 हेक्टेयर और रे वन रेंज में 25 हेक्टेयर भूमि पर पौधे लगाए गए।
पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन बनाने के लिए नूरपुर वन मंडल के तहत 22,284 पेड़ काटे गए थे। इनमें 17,973 पेड़ सरकारी वन भूमि और 4,311 पेड़ निजी भूमि पर थे। इन पेड़ों की कटाई वर्ष 2022-23 और 2023-24 में हुई थी।
वन विभाग के अनुसार पौधरोपण प्रतिपूरक वनीकरण के तहत किया गया है। इसके लिए एनएचएआई ने प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण में निर्धारित राशि जमा करवाई है।
बड़े पेड़ों की जगह पौधों से तत्काल भरपाई नहीं
बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई के बाद पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर स्थानीय पर्यावरणविदों ने चिंता जताई थी। पर्यावरणविद एमआर शर्मा ने कहा कि लगाए गए पौधों को बड़े पेड़ बनने में कई वर्ष लगेंगे। इसलिए इनसे तत्काल वह पर्यावरणीय सुरक्षा नहीं मिल सकती, जो पुराने और बड़े पेड़ों से मिलती थी। उन्होंने पौधों के जीवित रहने की दर को अभियान की सफलता का अहम पैमाना बताया।
विभाग ने दो साल में पौधरोपण का निर्धारित लक्ष्य पूरा कर लिया है। लगाए गए पौधों की अगले 10 वर्ष तक नियमित देखरेख और निगरानी की जाएगी। पौधों के जीवित रहने, विकास और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि प्रतिपूरक पौधरोपण का उद्देश्य पूरा हो सके। संदीप कोहली, डीएफओ, नूरपुर