पौंग विस्थापितों को मंजूर नहीं सरकार का फैसला
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सरकार को दी चेतावनी, पौंग में 7000 फीट के बाद करेंगे खेती
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सचिवों के फैसले से खफा हुई पौंग बांध विस्थापित समिति
अमर उजाला ब्यूरो
जवाली (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश पौंग बांध विस्थापित समिति के अध्यक्ष हंसराज ने जवाली में आयोजित बैठक में हिमाचल और राजस्थान सरकार के सचिवों के बीच लिए लिए गए फैसले पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि विस्थापितों को सरकारों का फैसला कतई मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि विस्थापित अब चुप नहीं बैठेंगे।
उन्होंने कहा कि दोनों सरकारों के सचिवों के बीच फैसला लिया गया है कि पौंग विस्थापितों को दो चरणों में पट्टे अलाट किए जाएंगे, लेकिन ऐसा करने से हाईकोर्ट के 30 अक्तूबर 2018 को लिए गए फैसले की उल्लंघना हुई है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश थे कि प्रदेश सरकार राजस्थान सरकार के खर्च पर हिमाचल में जमीन खरीदे और विस्थापितों को हिमाचल में ही बसाए। पौंग बांध विस्थापित समिति के अध्यक्ष हंसराज ने कहा कि समझौते के अनुसार श्रीगंगानगर में जमीन आरक्षित की थी, लेकिन अब वहां पर अवैध कब्जाधारियों ने कब्जे कर रखे हैं। उन्होंने कहा कि पौंग विस्थापितों को अगर राजस्थान सरकार जमीन नहीं दे सकती तो राजस्थान में रेट के हिसाब से मुआवजा दे। हंसराज ने कहा कि विस्थापित 46 सालों से विस्थापन का दंश झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 330 गांवों के करीब 30 हजार परिवार विस्थापित हुए थे, जिनकी आज आबादी करीबन 5 लाख पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि अगर हाईकोर्ट के आदेशानुसार फैसला न लिया गया तो पौंग डैम का जलस्तर 1200 फीट की बजाय 700 फीट ही चढ़ने दिया जाएगा और बाकी जमीन पर खेतीबाड़ी की जाएगी।
जमीन चाहिए तो सिर्फ गंगानगर में
राजा का तालाब (कांगड़ा)। बीते पांच दशक से पौंग बांध विस्थापितों का दर्द शायद ही कभी किसी सरकार ने समझने की कोशिश की। पौंग बांध प्रभावित समिति के अध्यक्ष हंसराज ने कहा कि विस्थापित जल्द ही नई रणनीति बनाकर आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर होंगे। समिति के उपाध्यक्ष एमएल कौंडल व सचिव एचसी गुलेरी ने कहा कि हाईकोर्ट के दिशा निर्देशों के बाद प्रदेश मुख्य सचिव व राजस्थान के मुख्य सचिव की वार्ता से उन्हें उनकी लंबित मांगों की हल होने बारे पूर्ण आशा थी, परंतु ऐसा नहीं हो सका। अब फिर से द्वितीय चरण में भूमि का आवंटन किया जाएगा, जो समझौते से बिल्कुल अलग होगा। समिति ने कहा कि द्वितीय चरण में आवंटित भूमि उन्हें मान्य नहीं होगी। सिर्फ जिला गंगानगर में भूमि का आवंटन किया जाए या जल्द मुआवजे का प्रावधान किया जाए। समिति का कहना है कि यदि उनकी समस्याएं हल नहीं होती हैं, तो आने वाले लोकसभा चुनाव में प्रदेश के हजारों पौंग बांध विस्थापित मतदान का बहिष्कार करेंगे।