डरोह (कांगडा)। कांगड़ा-चंबा लोक सभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के पैतृक गांव गढ़जमूला में शिक्षा बदहाल होती नजर आ रही है। इसका प्रमाण है कि साल 1986 में स्नरोन्नत हुए गढ़जमूला स्कूल को अब तक डीपीई का पद ही स्वीकृत नहीं हो पाया है। वहीं, स्कूल में करीब आधा दर्जन अध्यापकों के पद खाली चल रहे हैं।
स्कूल में डीपीई का पद स्वीकृत न होने से स्कूली बच्चे खेलकूद प्रतियोगिता के लिए बिना शारीरिक शिक्षक के ही तैयारियां करते हैं। वहीं, जमा एक और जमा दो के विद्यार्थी शारीरिक शिक्षा की पढ़ाई भी स्वयं ही कर रहे हैं। 32 वर्षों में कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन गढ़जमूला स्कूल को अब तक डीपीई नहीं मिलना स्कूली बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उधर, स्कूल के प्रधानाचार्य ओंकार सिंह पटियाल ने बताया कि स्कूल में अध्यापकों के कई पद रिक्त हैं। वाणिज्य विषय में एक ही प्रवक्ता है, जो दोनों कक्षाओं लेखांकन और व्यावसायिक अध्ययन पढ़ा रहा है। वहीं, डीपीई का पद स्वीकृत नहीं है।
इन विषयों के पद भी कई वर्षों से खाली
गढ़जमूला स्कूल में संस्कृत, कला, पीईटी और प्रवक्ता वाणिज्य का पद खाली है। वहीं, गैर शिक्षक वर्ग में कार्यालय अधीक्षक भी स्कूल के पास नहीं है। इससे कार्यालय के काम निपटाने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
शिक्षकों के बिना प्रभावित हो रही पढ़ाई
एसएमसी प्रधान कुलदीप सिंह ने बताया कि लंबे समय से यहां अध्यापकों के कई पद खाली हैं। इसकी जानकारी कई बार शिक्षा विभाग को भेजी जाती रही है। विभाग खाली पदों की जानकारी लेता जरूर है, लेकिन पदों को भरता नहीं है। ऐसे में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
शीघ्र भरे जाएंगे रिक्त पद : परमार
सुलह हलके के विधायक एवं प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा है कि बहुत ही जल्द गढ़जमूला ही नहीं, बल्कि हलके के जिन भी स्कूलों में अध्यापकों के पद रिक्त हैं, उन्हें भर दिया जाएगा। गढ़जमूला पाठशाला में डीपीई का पद भी स्वीकृत करवाया जाएगा।