बैजनाथ (कांगड़ा)। कांगड़ा घाटी में रेलवे के भाप इंजन से पर्यटन व्यवसाय को पंख लगने की उम्मीद जगी है। बर्फ से लदी धौलाधार पहाड़ियों के आंचल में 42 वर्ष पूर्व चलने वाले इस भाप इंजन को डीजल इंजन के आने के बाद बंद कर दिया गया था। अब पठानकोट रेलवे में एडीएन जितेंद्र सिंह के प्रयासों से इस इंजन को एक बार फिर से इस मनमोहक प्राकृतिक दृष्यों से परिपूर्ण कांगड़ा घाटी के रेलवे ट्रैक पर उतारा गया है। पपरोला रेलवे स्टेशन पर खड़े भाप इंजन को तीन यात्री डिब्बों के साथ 12 जनवरी को पपरोला (बैजनाथ) से पालमपुर (मारंडा) के बीच ट्रायल के तौर पर दौड़ाया जाएगा। प्रयोग के सफल रहने पर आगामी दिनों में भाप इंजन की शुरुआत को अंजाम दिया जा सकेगा। साल 1952 में बनाए गए इस भाप इंजन में ट्रैक पर आने वाली चढ़ाई चढ़ने की क्षमता के कमजोर होने के कारण अब तक के ट्रायल पूरी तरह से सफल नहीं हो सके हैं।
अब इस इंजन में कुछ तकनीकी खामियों को दूर किया गया है और शुक्रवार को प्रस्तावित ट्रायल के सफल रहने की पूरी उम्मीद की जा रही है। इससे पहले इस इंजन को पठानकोट से डलहौजी रोड तक के 21 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर सफलता पूर्वक दौड़ाया जा चुका है। भाप इंजन चलित ट्रेन के ट्रैक पर दौड़ने से कांगड़ा के पर्यटन को पंख लगेंगे और गर्मियों के सीजन में बाहरी प्रदेशों से आने वाले पर्यटकों के लिए इस ट्रैक पर भाप इंजन से सफर करना अपने आप में एक अलग तरह का अनुभव होगा। भाप इंजन के चलने से रेलवे विभाग के लिए घाटे में चल रहे इस ट्रैक को संजीवनी मिल सकेगी। एडीएन जितेंद्र सिंह ने बताया कि शुक्रवार को पपरोला से पालमपुर तक ट्रायल किया जाएगा और इसके सफल रहने की उम्मीद है।