धर्मशाला। टिकट आवंटन से पहले कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर शुरू हुई वर्चस्व की जंग एक बार फिर से नगरोटा बगवां में राहुल गांधी की रैली के दौरान दिखी। सीएम पद को लेकर बाली और वीरभद्र सिंह के बीच चल रहे शीत युद्ध में कार्यकर्ताओं के बाली को सीएम बनाने के नारों से चिंगारी भड़का दी। चुनाव से ठीक 3 दिन पहले नगरोटा बगवां में राहुल की रैली के दौरान वीरभद्र सिंह और राहुल गांधी के सामने बाली को सीएम बनाने के नारों और सीएम के माइक छोड़ने की नाराजगी के कई राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। हालांकि, भाषण के दौरान राहुल गांधी ने वीरभद्र सिंह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बेहतर बताकर सियासी डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की।
टिकट आवंटन के दौरान हाईकमान की ओर से बाली-सुक्खू और वीरभद्र गुटों में घोली गई सियासी मिसरी राहुल की रैली में हल्की कड़वी हो गई। रैली में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू भी मौजूद थे, लेकिन माइक पर बोल नहीं पाए। प्रदेश प्रभारी सुशील कुमार शिंदे को भी बोलने का मौका नहीं मिला। बाली कुछ मिनट के लिए बोले और वीरभद्र सिंह ने माइक बीच में छोड़ दिया। राहुल की रैली में केवल पठानिया और आशीष बुटेल के अलावा कोई भी कांग्रेस उम्मीदवार नहीं पहुंचा था। बाली और वीरभद्र के बीच तल्खी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब दो माह पहले आमंत्रण के बावजूद सीएम वीरभद्र कांगड़ा में रहते हुए भी नगरोटा बगवां में कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन में नहीं आए थे। इस सम्मेलन में कांग्रेस के पूर्व विधायक निखिल राजौर ने प्रदेश प्रभारी सुशील शिंदे, प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू और बाली के समक्ष वीरभद्र सिंह को काली भेड़ के नाम से संबोधित किया था। हालांकि, सीएम का पहले चंबा के बाद सीधे नाहन जाने का कार्यक्रम था, लेकिन राहुल के कहने पर वीरभद्र ने वर्ष 2015 के शीतकालीन प्रवास के बाद पहली बार बाली की रैली में मंच साझा किया। वर्ष 2015 की रैली के दौरान भी वीरभद्र सिंह ने नगरोटा बगवां में हल्की नाराजगी समर्थकों पर दिखाई थी। अब राहुल की रैली में हाईकमान ने बाली और वीरभद्र सिंह के दिल तो मिलाने की कोशिश की, लेकिन समर्थकों की नारेबाजी ने इसमें खलल डाल दिया। वर्चस्व की जंग का चुनाव में क्या असर पड़ता है इसका पता चुनाव परिणाम ही बता पाएंगे।