अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। विलुप्त होते लोक गीतों को लोक गायक सुनील राणा की गदियाली नाटी नॉन स्टाप संजीवनी का काम करेगी। शनिवार को धर्मशाला में कांगड़ा जिला की संस्कृति रलियों का मेला, विवाह में हंसी-मजाक में शालियों की ओर से गाई गालियों और शिव आराधना नुआला से लिए गए गीत को मिलाकर एलबम का ऑडियो लांच किया गया है।
अप्रैल माह के अंत में एलबम का वीडियो भी जारी किया जाएगा। लोक गायक सुनील राणा की नई एलबम गदियाली नाटी नॉन स्टाप का विमोचन उनके पिता किशन लाल हिंयूरी, माता कमला राणा हिंयूरी और संगीत के गुरु डॉ. सतीश ठाकुर ने किया। गाने का ऑडियो यू-ट्यूब चैनल शेफर्ड हार्मोनी में किया गया है।
सुनील राणा ने कहा कि लंबे समय से युवाओं की ओर से निचले हिमाचल के गीतों पर आधारित नाटी की मांग की जा रही थी। इसको ध्यान में रखते हुए तीन लोक गीतों पर आधारित नाटी की एलबम बनाई गई है। उन्होंने कहा कि ऑडियो के साथ गाने के बोल भी चलेंगे। इससे कि युवाओं को गीत के बोल भी समझ आएं। त्रिगर्त स्टूडियो के सहयोग से डॉली राणा हिंयूरी के प्रोडक्शन में इसे तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि लोक संस्कृति पर आधारित नाटियों के अन्य प्रोजेक्ट पर भी काम चला है, जो शीघ्र पूरे किए जाएंगे। गदियाली नाटी नॉन स्टाप में पहला गीत रलिया खेरा मेला है, जो देवर-भाभी के पवित्र रिश्ते में व्यंज्ञात्मकता को दर्शाते हुए मेले में जाने की बात करता है। दूसरे गीत में जलिए धारा वो खेरिए गीत, जो विलुप्त होती विद्या गालियां कहलाती हैं। यह उस समय गाई जाती हैं, जब दुल्हा पक्ष दुल्हन के घर बारात लेकर पहुंचता है। वहीं तीसरे गीत में हेर मछली तै ऊपर जाल को नुआला में गाया जाता है।