टीबी के मरीजों को को-ऑपरेटिव
बैंकों में नहीं मिल रही राहत राशि
इस राशि को केवल राष्ट्रीयकृत बैंकों के खातों में डालने का प्रावधान
प्रदेश के कई दुर्गम क्षेत्रों में नहीं हैं राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाएं
विपिन चौधरी
धर्मशाला। प्रदेश सरकार के अधीन बैंकों के टीबी से ग्रसित उपभोक्ताओं को सरकार की ओर से दी जा रही राहत राशि नहीं मिल पा रही है। सरकार की ओर से इस राशि को केवल राष्ट्रीयकृत बैंकों में चल रहे मरीजों के खातों में ही डालने का प्रावधान है। ऐसे में प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों के टीबी के मरीजों तक यह राशि नहीं पहुंच पा रही है। प्रदेश के कई हिस्से ऐसे हैं, जहां पर राष्ट्रीयकृत बैंक नहीं हैं और अगर हैं भी तो इतनी दूर कि वहां पर पहुंचने में ही सरकार की ओर से दी जाने वाली 500 रुपये की राशि किराये के रूप में खर्च हो जा रही है। ऐसे में मरीजों को सरकार की ओर से दी जाने वाली यह राहत राशि कोई मायने नहीं रख रही है।
टीबी के पंजीकृत मरीजों को जब तक वह दवाई खाता रहा है, तब तक प्रतिमाह 500 रुपये की राहत राशि सरकार देती है। भले ही मरीज निजी अस्पताल से ही दवाई क्यों न खा रहा हो, लेकिन प्रदेश के मरीजों को यह सुविधा हिमाचल के ग्रामीण बैंकों में नहीं मिल पा रही है। क्योंकि, योजना के जो पैसे हैं, वह केवल राष्ट्रीयकृत बैंकों में चल रहे खातों में ही जाएंगे। पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) योजना के तहत यह बैंक इस योजना के साथ जुड़े नहीं हैं, जिससे इन बैंकों के उपभोक्ताओं को जो कि टीबी की बीमारी से ग्रस्त हैं, उन्हें लाभ मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इन बैंकों में नहीं मिल पा रही सुविधा
प्रदेश में सेवाएं दे रहे हिमाचल ग्रामीण बैंक, द एचपी स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक, कांगड़ा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक, परवाणू अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक, द भगत अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक और जोगिंद्रा सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंकों के खाताधारक मरीजों को इस सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है।
कोट्स
-टीबी के मरीजों के लिए यह योजना लाभकारी है। अगर स्थानीय बैंकों में इस योजना का संबंधित मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है तो इस पर विचार कर उन्हें लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
- विपिन सिंह परमार, स्वास्थ्य मंत्री