नूरपुर (कांगड़ा)। आखिरकार करीब चौदह साल के लंबे इंतजार के बाद भाजपा की टिकट पर चुनावी दंगल में उतरे राकेश पठानिया का सियासी बनवास शानदार जीत के साथ ही खत्म हो गया। कांग्रेस प्रत्याशी अजय महाजन के साथ सीधे मुकाबले में भाजपा उम्मीदवार राकेश पठानिया ने 6804 वोटों के अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
कांग्रेस का गढ़ कहे जाने वाले नूरपुर विधानसभा के चुनावी इतिहास में कांग्रेस की यह अब तक की सबसे बड़ी हार है, इससे पहले कांग्रेस के फील्ड मार्शल कहे जाने वाले स्वर्गीय सत महाजन और पूर्व मंत्री केवल सिंह पठानिया के बीच हार-जीत का अंतर कभी भी दो-तीन हजार वोटों से ज्यादा नहीं रहा। भाजपा के युवा तुर्क राकेश पठानिया की यह ऐतिहासिक जीत इसलिए भी काफी मायने रखती है कि नूरपुर हलके की सियासत में राकेश पठानिया ही इकलौते भाजपा नेता हैं। इनके सिर पर कांग्रेस के दुर्ग में दूसरी बार कमल खिलाने का सेहरा सजा है। इससे भी दिलचस्प पहलू यह है कि इस बार जितनी भाजपा प्रत्याशी राकेश पठानिया ने 6804 मतों की लीड हासिल की है। पिछले विस चुनाव में उतने के करीब भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी को कुल वोट मिले थे, जबकि इस बार भाजपा प्रत्याशी राकेश पठानिया अकेले अपने बूते पर चुनाव में कांग्रेस के पूरे कुनबे के सामने डटे रहे। इस शानदार जीत के साथ राकेश पठानिया वर्ष 1998, 2007 के बाद अब 2017 में तीसरी बार विधानसभा पहुंचने में कामयाब रहे। वर्ष 1998 में राकेश पठानिया ने बतौर भाजपा प्रत्याशी नूरपुर हलके में भाजपा का कमल खिलाया था। इसके बाद 2003 में कांग्रेस के फील्ड मार्शल सत महाजन के हाथों करारी शिकस्त खाने के बाद 2007 में भाजपा की टिकट कटने के बाद बतौर आजाद उम्मीदवार चुनाव में उतरे राकेश पठानिया ने वापसी की। उस चुनाव में कांग्रेस टिकट पर पहली मर्तबा चुनाव लड़ने वाले स्वर्गीय सत महाजन के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में उनके बेटे अजय महाजन ने अपनी सियासी पारी की शुरुआत की थी। वर्ष 2012 में लगातार दूसरी बार भाजपा सरकार में पांच साल तक एसोसिएट मेंबर रहने के बावजूद राकेश पठानिया का टिकट काट दिया गया और राकेश पठानिया को अपना राजनीतिक करियर बचाने के लिए दोबारा आजाद प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में कूदना पड़ा। यह दूसरा मौका था जब भाजपा को लगातार दूसरी बार राकेश पठानिया की टिकट काटने का खामियाजा अपने अधिकृत प्रत्याशी की जमानत जब्त करवाकर भुगतना पड़ा। कुल मिलाकर इस बार भाजपा ने अतीत की गलतियों से सबक लेते हुए राकेश पठानिया को पार्टी का टिकट थमाया और नूरपुर की जनता ने भी राकेश पठानिया को सिर आंखों पर बिठाकर भाजपा की उम्मीद पर अपने विश्वास की मोहर लगाई।