लंज (कांगड़ा) वर्ष 1991 में पंजाब में एक आतंकी हमले का शहीद हुए अंमी चंद के सम्मान में 23 अक्तूबर को लंज में समारोह का आयोजन किया जाएगा। सम्मान समारोह में महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे।
जिला की मसरूर पंचायत के पनियाल गांव निवासी अंमी चंद का जन्म1945 में हुआ था। मिडिल स्कूल तक की पढ़ाई उन्होंने लंज स्कूल में प्राप्त की। उन दिनों 1962 की जंग के बाद देश की सेना को नौजवानों की जरूरत थी। युद्ध विराम होते ही मात्र 17 साल की उम्र में अमी चंद भारतीय सेना में भर्ती हुए 1965 और 1971 की जंग में भारतीय सेना के हिस्सा बने और बेहतरीन सेवाओं को लिए उन्हें रक्षा मेडल सहित पांच पदकों से नवाजा गया। 35 साल की उम्र में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वे चंडीगढ़ पुलिस में भर्ती हुए और अंतिम समय तक अपनी सेवाएं दी। अमी चंद के परिवार में उनकी विधवा शांति देवी के अलावा एक बेटी, दो बेटे हैं। दामाद आर्मी ऑफिसर हैं। बड़ा बेटा नरेंद्र पटियाल चंडीगढ़ पुलिस में इंस्पेक्टर और छोटा बेटा जगविंद्र पटियाल एबीपी न्यूज में एक्जीक्यूटिव एडीटर हैं। अंमी चंद की विधवा शांति देवी कहा कि उनके पति 29 अगस्त 1991 को शहीद हुए थे। उन दिनों पंजाब में आतंकवाद पूरे चरम पर था। उनके पति अमीं चंद उन दिनों चंडीगढ़ के तत्कालीन एसएसपी सुमेध सिंह सैनी के साथ तैनात थे। दोपहर तकरीबन 2:30 बजे चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में सुमेर सिंह सैनी के काफिले पर उग्रवादियों ने हमला कर दिया। इस आतंकी हमले में उनके पति दो साथियों सहित मौके पर ही शहीद हो गए, जबकि कई जवान अंग हीन हो गए थे। इस हमले की चपेट में कई राहगीर भी घायल हुए थे। अमीं चंद के छोटे बेटे जगविंद्र पटियाल ने बताया कि 1991 में एसएसपी के काफिले पर हुआ हमला और तत्कालीन पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह पर हुआ था। यह हमला चंडीगढ़ के इतिहास में उस दौर के सबसे खतरनाक और बड़े आतंकी हमले थे।