धर्मशाला (कांगड़ा)। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक एवं आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि तीन माह का बच्चा भी योग क्रियाएं शुरू कर देता है। लेकिन, जब उसे योग की जरूरत होती है तो वह इससे किनारा कर लेता है। अगर व्यक्ति लगातार योग करे तो वह जहां निरोगी होगा, वहीं हिंसा करने से भी गुरेज करेगा। इंडोर स्टेडियम धर्मशाला में आर्ट ऑफ लिविंग के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आध्यात्मिक गुरु ने कहा कि योग ही एकमात्र ऐसा रास्ता है, जो देश में हिंसा को समाप्त कर सकता है। उन्होंने जंक फूड से साधकों को दूर रहने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने आत्म मंथन करने के साथ-साथ खुद को पहचानने की भी बात कही। श्रीश्री रविंशकर के अनुसार आज योग साधना का ही नतीजा है कि मणिपुर के लोग आत्मसाधना में लीन हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर की जेलों में भी योग साधनाएं करवाकर वहां पथभ्रष्ट हुए लोगों को सद्मार्ग पर लाया जा रहा है। साधना, सत्संग और सेवा करने से ही दुख, झंझट और परेशानी दूर होती है।
लोभ-प्रेम-भय से दूर होत सकती है पीड़ा
एक साधक के प्रश्न पीड़ा से कैसे छुटकारा पाया जा सकता है, पर श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि पीड़ा को हम लोभ, भय और प्रेम से दूर कर सकते हैं। वहीं अगर हम नियमित ध्यान करें तो अपने गुस्से पर काबू पा सकते हैं। वहीं प्रेम क्या है, के जवाब में श्रीश्री रवि शंकर ने जवाब देते हुए कहा कि आज इतनी भीड़ जो यहां सत्संग सुनने आई है, अगर यह प्रेम नहीं है तो और क्या है।
मन मजबूत तो पास नहीं आएंगे भूत
श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि अगर व्यक्ति का मन मजबूत है तो उसे भूत-प्रेत का कोई डर नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जो मन में ठान लेता है, वह वैसा ही करता है। इसलिए अपने मन को पूरी तरह से मजबूत करना चाहिए।