धर्मशाला। दार्जिलिंग हिल्स को अलग राज्य बनाने की मांग और घाटी में गोरखा के आंदोलन को समर्थन देने के लिए मंगलवार को धर्मशाला में प्रदर्शन हुआ।
हिमाचल एवं पंजाब गोरखा एसोसिएशन के बैनर तले शहीद स्मारक में हुए प्रदर्शन में जहां एसोसिएशन ने दार्जिलिंग को अलग राज्य बनाने की मांग पर बल दिया। वहीं, दार्जिलिंग में शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे आंदोलनकारियों पर पश्चिम बंगाल सरकार के बल प्रयोग करने के खिलाफ रोष भी प्रकट किया। एसोसिएशन के सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर उपायुक्त कांगड़ा सीपी वर्मा के माध्यम से राष्ट्रपति को मांगपत्र भी भेजा।
हिमाचल एवं पंजाब गोरखा एसोसिएशन रविंद्र सिंह राणा ने कहा कि दार्जिलिंग हिल्स में आंदोलनकारियों पर पुलिस फायरिंग में तीन युवक मारे गए हैं। दार्जिलिंग में देश के संविधान के तहत गोरखा समुदाय के लिए भाषा के आधार पर अलग राज्य बनाया जाना चाहिए। यह गोरखा समुदाय की 110 वर्ष पुरानी मांग है। भाषा और भौगोलिक दृष्टि के आधार पर देश में कई राज्यों का गठन हुआ है। इसी तर्ज पर दार्जिलिंग हिल्स के गोरखा समुदाय को भी अलग राज्य मिलना चाहिए। दार्जिलिंग हिल्स का आंदोलन केवल मात्र अलग राज्य के लिए नहीं है। यह गोरखा समुदाय की पहचान एवं अस्तित्व की लड़ाई भी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से बंगाली भाषा को जबरन नेपाली भाषी क्षेत्र में थोपने के प्रयास एवं गोरखों को तथाकथित आतंकवादी कहने पर उनकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा गोरखा समुदाय के लोगों ने देश की सेवा की है। गोरखा जाति को अपनी बहादुरी का प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है। प्रदर्शन के बाद समुदाय के लोगों ने शहीद स्मारक से उपायुक्त कार्यालय तक शांतिप्रिय तरीके से रैली निकाल प्रदर्शन किया। इससे पूर्व एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने शहीद स्मारक धर्मशाला में शहीदों और दार्जिलिंग आंदोलन में मारे गए तीन युवकों को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर शहीद दुर्गामल दल बहादुर शहीद वाटिका स्मृति मंच के अध्यक्ष कर्नल महिंद्र सिंह कार्की, लेखिका ज्योति थापा, पार्षद सुनील खंडका, कर्नल एसडी पुन और एडवोकेट शिवशंकर शर्मा आदि सहित 18 गांवों के मुखिया और आम लोग शामिल रहे।