हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने जेबीटी भर्ती पर लगी रोक को सशर्त हटा दिया है। इससे जेबीटी के 1308 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
कमलेश राणा बनाम हिमाचल सरकार के केस में न्यायाधीश राजीव शर्मा ने आदेश पारित किया है कि केवल 4 जेबीटी पदों पर हाईकोर्ट की अनुमति के बिना भर्ती न की जाए। शेष पदों पर राज्य सरकार और शिक्षा विभाग भर्ती कर सकता है।
यह रोक आठ महीने पहले लगी थी। इस विवाद के कारण जेबीटी की भर्ती वर्ष 2011 से लंबित है।
जेबीटी भर्ती में पूर्व सैनिक कोटे एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि पूर्व निर्धारित दिशा निर्देशों का उल्लंघन किए बिना जेबीटी भर्ती 6 सप्ताह के भीतर की जाए।
न्यायाधीश संजय करोल के इस फैसले का लाभ भूतपूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को होगा। 15 अगस्त 2010 को पूर्व भाजपा सरकार ने जेबीटी भर्ती का ऐलान किया था। इसे फरवरी, 2011 तक सिरे नहीं चढ़ाया गया।
उस समय तक टीईटी अनिवार्य नहीं था और भर्ती पुराने भर्ती नियमों के तहत बैच आधार पर की जा सकती थी।
लेकिन फरवरी, 2011 में टीईटी जरूरी होने की अधिसूचना के बाद जेबीटी को बिना टीईटी नौकरी देने से शिक्षा विभाग ने मना किया।
फिर टीईटी मैरिट पर 1308 जेबीटी पदों पर सितंबर 2012 में भर्ती शुरू की। इससे नाखुश कई बेरोजगार हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट ने 24 सितंबर, 2012 को जेबीटी भर्ती कोर्ट की आज्ञा के बिना करने पर पूर्ण रोक लगा दी थी।
टीईटी पर स्थिति स्पष्ट करे सरकार
शिक्षक क्रांति मंच के अध्यक्ष विजय हीर ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए प्रदेश सरकार से मांग की है कि अब जेबीटी भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए। क्योंकि पिछले 8 महीने से जेबीटी प्रशिक्षु नौकरी का इंतजार कर रहे हैं।
उन्होंने भर्ती मापदंड भी शीघ्र सार्वजनिक करने की गुहार लगाई है, ताकि भर्ती पर टीईटी को लेकर स्थिति साफ हो।