उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस नेताओं में जरा सी भी लज्जा बची है तो उन्हें इस कार्यक्रम को रद्द कर आपदा प्रभावितों को सही मायने में राहत पहुंचाने का काम करना चाहिए। सरकार आपदा के नाम पर पंचायत चुनाव टालने की हर कोशिश कर चुकी है। अभी भी सरकार का रवैया और मुख्यमंत्री का वक्तव्य इस बात की तरफ इशारा कर रहा है कि वह पंचायत चुनाव के पक्ष में नहीं है। मुमकिन है कि मुख्यमंत्री आगे भी पंचायत चुनाव में अड़ंगा डालने की हरसंभव कोशिश करें। मंगलवार को विधानसभा परिसर स्थित अपने कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए नेता विपक्ष ने कहा कि हिमाचल की आपदा में हर बार केंद्र का अद्वितीय सहयोग रहा है। 2023 से अब तक आपदा रात के नाम पर 5,500 करोड रुपये से ज्यादा की धनराशि दी गई।
इस वर्ष एनडीआरएफ और एनडीएमएफ के तहत लगभग 225 करोड़ रुपये केंद्र की ओर से हिमाचल को एडवांस में दिए गए हैं। इसके बाद भी आपदा प्रभावितों को सरकार 400 करोड़ रुपये की धनराशि भी नहीं दे पाई है। जबकि सरकार ने स्पेशल पैकेज 4500 करोड़ रुपये का घोषित किया था। जयराम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश को 1500 करोड़ रुपये देने की बात कही है तो वह पत्थर की लकीर है। उन्होंने कहा कि बिहार की तरह ही कांग्रेस का हिमाचल में हाल होगा। इस मौके पर विधायक विपिन सिंह परमार, सतपाल सिंह सत्ती, बिक्रम ठाकुर, राकेश जमवाल, सुरेंद्र शौरी, इंद्र सिंह गांधी और दलीप ठाकुर भी उपस्थित रहे।