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Jairam Thakur: नई होम स्टे पॉलिसी पर बरसे नेता प्रतिपक्ष, बोले- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कुचलना चाहती है सरकार

Tue, 18 Feb 2025 06:15 PM IST
अंकेश डोगरा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला

सार

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि होम स्टे की जो नई पॉलिसी सरकार द्वारा लाई जा रही है वह पूर्णतया तुगलकी और तानाशाही है।
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नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि एक तरफ सरकार प्रदेश के लोगों को रोज़गार नहीं दे रही है, स्वरोजगार के लिए उत्साहित नहीं कर रही है। दूसरी तरफ प्रदेश के लोग जो खुद से कुछ करना चाह रहे हैं उन्हें भी नहीं करने दे रही है। होम स्टे की जो नई पॉलिसी सरकार द्वारा लाई जा रही है वह पूर्णतया तुगलकी और तानाशाही है।

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नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार ऐसी नीति लाने के पहले एक बार भी उसकी व्यवहारिकता के बारे में नहीं सोच रही है। क्या सरकार की प्रदेश के लोगों के लिए भी कोई जिम्मेदारी है या सिर्फ प्रदेश के लोग अपनी गाढ़ी कमाई से इस व्यवस्था परिवर्तन वाली सुख की सरकार के मित्रों को पालने के लिए अभिशप्त हैं। प्रदेश के दूर दराज के इलाकों में जो होम स्टे प्रदेश की माताओं बहनों के आजीविका और आत्मसम्मान का आधार है, नई होम स्टे पॉलिसी लाकर सरकार उन्हें कुचलना चाहती है।

प्रदेश में मुखिया और सुख की सरकार के कर्ता धर्ता से मेरा आग्रह है कि अगर आप प्रदेशवासियों के लिए कुछ नहीं कर सकते तो कम से कम जो लोग खुद से कुछ कर रहे हैं उन्हें करने दे और उन्हें स्वाभिमान से जीने दे। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश भर की महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य के लिए काम कर रहे हैं तो दूसरी तरह हमारे मुख्यमंत्री प्रदेश की दीदियों से ही लखपति बनने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। सरकार पहले ही स्वावलंबन योजना को बंद कर चुकी है और कौशल विकास के तहत दिए जाने वाले व्यवसायिक प्रशिक्षण को भी छह महीनें से बंद कर रखा है।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार प्रदेश की ग्रामीण आजीविका का आधार बन रहे होम स्टे से जो फीस रजिस्ट्रेशन के नाम पर लेना चाहती है कई बार होम स्टे साल भर में उतना कमा भी नहीं पाते। पहले जो फीस पांच साल के लिए सौ रुपए थी अब वह एक साल के लिए तीन हजार कर दी। यानी की रजिस्ट्रेशन की फीस में 150 गुना की वृद्धि होने वाली है। मुख्यमंत्री एक बार सोचें कि क्या यह तर्क संगत है। क्या यह हिमाचल की मातृशक्ति के साथ धोखा नहीं हैं। वह क्यों भूल रहे हैं कि प्रदेश की महिलाओं को 1500 रुपए महीना देने की गारंटी देकर वह सत्ता में आए थे, लेकिन अब आत्म निर्भर महिलाओं से सरकार तीन हजार रुपए प्रति वर्ष वसूलने जा रही है।
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जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार की नई होम स्टे पॉलिसी प्रदेश की महिलाओं के साथ अन्याय हैं। कोई भी होम स्टे बिना मातृ शक्ति के चल ही नहीं सकता है। होम स्टे से कमाए पैसे से वह परिवार पालती हैं, बच्चों को पढ़ातीं हैं, उनके भविष्य के लिए बचत करती हैं। लेकिन सरकार की नई पॉलिसी से तो कई होम स्टे सरकार को उतना पैसा देने को बाध्य होंगे जितना वह साल भर में कमाएंगे भी नहीं। सरकार नई पॉलिसी के तहत अब होम स्टे के तहत 12 हज़ार से लेकर 3 हज़ार रुपए की रजिस्ट्रेशन फीस निर्धारित कर रही है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि नई होम स्टे पॉलिसी में रजिस्ट्रेशन के लिए जीएसटी नंबर की शर्त सभी के लिए अनिवार्य की है। जबकि जीएसटी कौंसिल द्वारा 20 लाख के वार्षिक टर्न ओवर की सीमा वाले व्यवसायी के लिए जीएसटी में छूट है। अब गांव में एक दो कमरे में होम स्टे चलाने वाली महिला कहाँ से जीएसटी नम्बर वाले डॉक्यूमेंट्स लाएगी, जीएसटी नंबर लाएगी, हर महीने कैसे जीएसटी रिटर्न भरेगी? कैसे रजिस्टर मेंटेन करेगी? ऐसी स्थिति में तो वह जितना कमाएगी उससे ज्यादा अकाउंटेंट को देने पड़ जाएंगे। सुक्खू सरकार द्वारा लाई जा रही यह नई होम स्टे पॉलिसी हिमाचल प्रदेश के आम जनता की विरोधी है। हिमाचल प्रदेश के विकास की विरोधी है। होम स्टे हिमाचली संस्कृति के अग्रदूत के रूप में काम कर रहे हैं, जब लोग हिमाचल के दूर दराज के गांवों में जाकर रुकते हैं तो वह हिमाचल की संस्कृति से रूबरू होते हैं।
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