यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 13.24 प्रतिशत अधिक है। धार्मिक पर्यटन स्थलों को ट्रैकिंग रूट के रूप में इस्तेमाल करने से पानी और शीतल पेय की खाली बोतलों, चिप्स रैपर, शराब की बोतलों का कचरा लगातार बढ़ रहा है। 2025 में पहली बार किन्नौर के कासुराज महाराज ने किन्नौर कैलाश यात्रा रोकने का आदेश दिया। इसी तरह ब्रह्माणी माता, नगेला दमाहरी देवता और बिजली महादेव ने भी प्रदूषण और जंगल कटान पर नाराजगी व्यक्त की है। पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि धार्मिक स्थलों पर कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की नीतियां तत्काल लागू नहीं की गईं तो हिमालय का प्राकृतिक संतुलन और धार्मिक विरासत दोनों खतरे में पड़ जाएंगे। इससे लोगों के जीवन पर भी बुरा असर पड़ने की आशंका है।
हिमाचल के धार्मिक स्थलों का बतौर पर्यटन स्थल बढ़ता प्रयोग चिंतनीय है। साल दर साल हिमालयी क्षेत्रों के धार्मिक स्थलों पर प्रदूषण बढ़ रहा है, जिसे रोकना बेहद जरूरी है। हिमाचल आने वाले सैलानियों के धार्मिक स्थलों का रुख करने की संख्या हर साल बढ़ रही है। - रवीश मृगेन्द्र, शोधार्थी टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट विभाग, केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला
श्रीखंड महादेव, कमरुनाग जैसे स्थलों में कचरा बढ़ा
धार्मिक पर्यटन स्थलों को ट्रैकिंग रूट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। श्रीखंड महादेव, कमरुनाग झील, पराशर झील, आदि हिमानी चामुंडा, चूड़धार, मणिमहेश, किन्नर कैलाश सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर बीते 10 वर्षों में प्रदूषण में भारी इजाफा हुआ है। स्थानीय देवता कई बार अपने गुरों के माध्यम से भी चेतावनी जारी कर चुके हैं।