इससे प्रदूषण कम हो जाएगा और ट्रैक के साथ हरे-भरे पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचेगा। बडोग रेलवे स्टेशन पर हाइड्रोजन प्लांट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। अब सर्वे रिपोर्ट पर मंथन के बाद रेल मंत्रालय की ओर से हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल की अनुमति देगा। केंद्र सरकार ने वर्ष 2024-25 में हेरिटेज रेल लाइन पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने के लिए योजना में शामिल किया था। इसके बाद से लगातार सर्वे रेल बोर्ड की ओर से करवाए जा रहे थे। उधर, रेल बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार बीते दिनों हाइड्रोजन ट्रेन चलाने के लिए सर्वे किया जा चुका है। इसी के साथ बड़ोग में फ्यूल प्लांट बनाने के लिए भी जगह देखी गई है। आगामी कार्य रेल मंत्रालय की ओर से किया जा रहा है।
35 हाइड्रोजन ट्रेनों में कालका-शिमला भी शामिल
रेल मंत्रालय ने 35 हाइड्रोजन ट्रेनों में विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलवे ट्रैक को भी शामिल किया है। हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज योजना के तहत यह कार्य हो रहा है। इससे पहले जींद से सोनीपत के बीच ट्रेन चल रही है। देश की यह ब्रॉडगेज रेल सेक्शन में पहली ट्रेन है। अगर रेल मंत्रालय की आगामी कार्रवाई पूरी हो जाती है और ट्रेन चल पड़ती है तो नेरोगेज रेल लाइन की पहली हाइड्रोजन ट्रेन होगी।
122 वर्षों पुराना है इतिहास
कालका-शिमला रेलवे का इतिहास 122 साल पुराना है। 103 सुरंगे, 800 से अधिक पुल और लगभग 900 तीखे मोड़ हैं। रेल लाइन पर कोयले से लेकर डीजल तक के लोको मोटिव का बदलाव हुआ है। अब तेजी से ट्रैक को भी आधुनिकीकरण के साथ बदला जा रहा है। नए डिब्बे ट्रैक पर चलने वाले हैं। इसके अलावा ट्रेनसेट भी लगभग चलाने की तैयारी बोर्ड कर रहा है। इससे पर्यटकों की यात्रा और बेहतर हो जाएगी।
विश्व धरोहर कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर आधुनिक सुविधाएं रेलवे बोर्ड उपलब्ध करवा रहा है। अब प्रदूषण कम और पर्यावरण को बचाने के लिए हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज योजना के तहत कार्य हो रहा है। केंद्रीय रेल मंत्रालय ने इसमें तेजी लाई है। आगामी दिनों में बैठक होनी है। हाइड्रोजन ट्रेन के चलने से काफी फायदा मिलेगा। बड़ोग में प्लांट बनाने के लिए भी जगह चयनित की गई है। टीम ने भी दौरा किया है।-सुभाष वर्मा, सदस्य, कालका-शिमला रेलवे समिति