हाईकोर्ट ने कहा कि इतने कम स्टाफ वाले संस्थान को शिफ्ट करने से कोई बड़ा लाभ नहीं होगा। यदि दफ्तर धर्मशाला शिफ्ट होता है, तो डेवलपर्स को पहले वहां संपर्क करना होगा और फिर अन्य अनुमतियों के लिए वापस शिमला आना होगा। यह प्रक्रिया उनके लिए अत्यंत कठिन होगी। महाधिवक्ता ने तर्क दिया कि यह फैसला शिमला को डी-कंजस्ट (भीड़ कम करने) और कांगड़ा के विकास के लिए लिया गया है।