मामले के अनुसार याचिकाकर्ता जनक दुलारी के पति राम स्वरूप पुलिस विभाग में सेवा के दौरान लापता हो गए थे। इसके बाद उनका सेवाकाल समाप्त मान लिया गया था। परिवार को तात्कालिक वित्तीय संकट से बचाने के लिए राज्य सरकार ने याचिकाकर्ता को 23 जून 2007 को पुलिस महानिदेशक कार्यालय में अनुकंपा आधार पर अनुबंध क्लर्क नियुक्त किया था। याचिकाकर्ता ने 2013 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर विभाग के 2012 के उस आदेश को रद्द करने की मांग की थी, जिसके तहत उनकी नौकरी को नियुक्ति की तारीख (2007) से नियमित करने का दावा खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि विभाग में अन्य कई आश्रितों को नियमित पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं, इसलिए उनके साथ भेदभाव न किया जाए। अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।