हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एलपीजी आवंटन से जुड़े एक मामले में प्रस्तावित भूमि का नए सिरे से फील्ड वेरिफिकेशन (एफवीसी) करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने एकल जज के फैसले को निरस्त करते हुए भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को चार सप्ताह के भीतर मामले पर नए सिरे से विचार करने को कहा है।
खंडपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता ने एलपीजी गोदाम बनाने के लिए भूमि से बिजली के तार हटाने सहित सभी कमियों को दूर कर दिया था। खंडपीठ ने कहा कि एकल जज ने फैसले को पारित करते वक्त तेल कंपनियों के संशोधित दिशा-निर्देशों में लचीलेपन के प्रावधान को ध्यान में नहीं रखा, खासकर जब आवेदक ने कमियों को ठीक कर लिया हो। खंडपीठ ने कहा कि एलपीजी गोदाम बनाने के लिए भूमि पर बिजली तारों का होना एक बड़ी अयोग्यता थी, लेकिन याचिकाकर्ता ने इस कमी को बिजली बोर्ड से मिलकर अपने खर्च पर दूर कर दिया था। अदालत ने विजय कुमार बनाम भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और अन्य मामले में दायर अपील को स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया है।