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HP High Court: एलपीजी आंवटन मामले में नए सिरे से फील्ड वेरिफिकेशन करने के निर्देश, जानें पूरा मामला

Sat, 12 Jul 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला

सार

एलपीजी आवंटन से जुड़े एक मामले में प्रस्तावित भूमि का नए सिरे से फील्ड वेरिफिकेशन किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने ये निर्देश दिए हैं। पढ़ें पूरी खबर...

 
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एलपीजी आवंटन से जुड़े एक मामले में प्रस्तावित भूमि का नए सिरे से फील्ड वेरिफिकेशन (एफवीसी) करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने एकल जज के फैसले को निरस्त करते हुए भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को चार सप्ताह के भीतर मामले पर नए सिरे से विचार करने को कहा है।

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खंडपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता ने एलपीजी गोदाम बनाने के लिए भूमि से बिजली के तार हटाने सहित सभी कमियों को दूर कर दिया था। खंडपीठ ने कहा कि एकल जज ने फैसले को पारित करते वक्त तेल कंपनियों के संशोधित दिशा-निर्देशों में लचीलेपन के प्रावधान को ध्यान में नहीं रखा, खासकर जब आवेदक ने कमियों को ठीक कर लिया हो। खंडपीठ ने कहा कि एलपीजी गोदाम बनाने के लिए भूमि पर बिजली तारों का होना एक बड़ी अयोग्यता थी, लेकिन याचिकाकर्ता ने इस कमी को बिजली बोर्ड से मिलकर अपने खर्च पर दूर कर दिया था। अदालत ने विजय कुमार बनाम भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और अन्य मामले में दायर अपील को स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया है।

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यह है मामला
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने 13 अगस्त 2017 को विभिन्न स्थानों पर एलपीजी डीलरशिप के लिए संयुक्त रूप से आवेदन आमंत्रित किए थे। याचिकाकर्ता विजय कुमार ने जिला मंडी के धर्मपुर में इसके लिए आवेदन किया था। 11 जनवरी 2018 को उन्हें भारत पेट्रोलियम की डीलरशिप के लिए चुना गया। हालांकि, 17 जनवरी 2018 को फील्ड वेरिफिकेशन के दौरान अधिकारी ने पाया कि प्रस्तावित भूमि पर हाईटेंशन बिजली तार लटक रहे थे। 30 जनवरी 2018 और 7 फरवरी 2018 को याचिकाकर्ता को डीलरशिप के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसे एकल पीठ ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि आवेदन के समय गलत जानकारी दी गई थी। यह फैसला उन आवेदकों के लिए एक राहत है, जिन्हें मामूली कमियों के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
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