हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टाफ नर्सों की पदोन्नति से संबंधित राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह सिस्टर ट्यूटर के रिक्त पदों को शीघ्रता से भरें। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने यह प्रक्रिया दो महीने के भीतर पूरी करने और याचिकाकर्ताओं को यदि वे पात्र पाए जाते हैं, तो पदोन्नति देने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता जो आईजीएमसी, शिमला और नेरचौक मंडी में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत हैं। उनका मुख्य आरोप यह था कि वे 21 जनवरी 2025 को सिस्टर ट्यूटर के पद पर पदोन्नति के लिए पात्र हैं। बावजूद विभाग ने उनसे कनिष्ठ स्टाफ नर्सों को लाभ देने के उद्देश्य से उनकी पात्रता तिथि से ठीक पहले 20 जनवरी 2025 को विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक की, जिससे कनिष्ठ कर्मचारी सिस्टर ट्यूटर के कैडर में उनसे वरिष्ठ हो गईं।
अदालत ने पाया कि 20 जनवरी 2025 को हुई डीपीसी बैठक के समय याचिकाकर्ता पदोन्नति के लिए पात्र नहीं थे। हालांकि, विभाग की ओर से प्रस्तुत रिकॉर्ड से यह स्वीकार किया गया कि वर्तमान में सिस्टर ट्यूटर के 13 पद रिक्त हैं (जिसमें पिछली डीपीसी की समीक्षा के बाद खाली हुए पद और टांडा के 6 पद शामिल हैं)। कोर्ट ने इस बात पर संज्ञान लिया कि 12 से अधिक पद रिक्त हैं और याचिकाकर्ताओं ने अब भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार पात्रता हासिल कर ली है।