सुबह विधायक रणधीर शर्मा ने नियम-67 के तहत काम रोको प्रस्ताव लाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह फैसला चुनावों को टालने और राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस निर्णय से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। बदलाव का अधिकार देने से पारदर्शिता पर सवाल खड़े होंगे। दिसंबर 2025 या जनवरी 2026 में पंचायतीराज चुनाव प्रस्तावित थे। सरकार ने पहले चुनाव आयोग से टकराव लिया। इस मामले पर जब कुछ लोग हाईकोर्ट गए तो सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। इसी बीच पंचायतों का पुनर्गठन शुरू किया गया। बिना नियमों के मनमर्जी से पंचायतें बनाई गई। अब पंचायतों और पंचायत समीतियों के रोस्टर में बदलाव करने की अधिसूचना जारी कर दी है। चुनाव आयोग से भी इस बाबत चर्चा नहीं की गई। जवाब में राजस्व मंत्री जगत सिंह ने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर कई पंचायतें बार-बार आरक्षित हो रही हैं। सीमित दायरे में उपायुक्तों को रोस्टर में पांच फीसदी तक बदलाव का अधिकार दिया गया है, ताकि संतुलन बनाया जा सके।
नियमों की धज्जियां उड़ा रही सरकार, हर बात की बन रही जलेबी : जयराम
नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हर बात की जलेबी बनाई जा रही है। पंचायतीराज संस्थाएं लोकतंत्र की नीवं होती हैं। सरकार इस व्यवस्था को तार-तार करने में लगी है। 2011 की जनगणना के आधार पर ही चुनाव होना चाहिए। पांच फीसदी रोस्टर बदलने का उपायुक्तों को अधिकार देकर क्या किसी मित्र को अध्यक्ष बनाया जाना है। अगर उपायुक्त ने महिलाओं के लिए आरक्षित सीट को ओपन कर दिया तो महिलाएं कहां जाएंगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र खतरे में है। चुनावों से जुड़े आरक्षण रोस्टर में जानबूझकर देरी की जा रही है। सरकार चुनाव टालने के लिए विभिन्न हथकंडे अपना रही है और मुख्यमंत्री अपनी जिद्द पर अड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बैक डेट से नोटिफिकेशन जारी कर नियमों में बदलाव करने की कोशिश कर रही है, जो पूरी तरह गलत है।
राजनीति करनी होती तो डीसी को 25 फीसदी तक देते अधिकार : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल में 31 मई से पहले पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव होंगे। अगर कानूनी अड़चन आई तो अलग बात होगी। हालांकि, कोई अड़चन नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इस मामले पर सरकार को राजनीति ही करनी होती तो रोस्टर में बदलाव के लिए जिला उपायुक्तों को पांच नहीं 25 फीसदी के अधिकार दिए जाते। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा कि हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि व्यवस्था बदली चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान में आरक्षण का अधिकार है और रोस्टर तय करने का अधिकार राज्य सरकार का है। कई बार देखा गया है कि कोई सीट तो ओबीसी के लिए आरक्षित होती है लेकिन उस क्षेत्र में जनसंख्या ओबीसी की होती नहीं। 2011 की जनगणना के आधार पर ही चुनाव होंगे। सर्वे को भी देखा जाएगा ताकि किसी के साथ अन्याय ना हो।
विधायक रणधीर और मंत्री जगत नेगी में वार-पलटवार
चर्चा के दौरान भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि उपायुक्तों को रोस्टर में बदलाव का अधिकार देने के लिए रात के अंधेरे में अफसरों के माध्यम से वाया सर्कुलेशन कैबिनेट से प्रस्ताव पास करवाया गया। यह वही अफसर हैं जिन्हें रात के अंधेरे में निपटाने की बातें होती थी। इस पर मंत्री जगत सिंह नेगी ने पलटवार कर कहा कि रात के अंधेरे में तो नोटबंदी जैसे फैसले होते हैं। हमारी सरकार ऐसा नहीं करती। उधर, मुख्यमंत्री ने नेता विपक्ष पर सही शब्दाबली का प्रयोग नहीं करने का आरोप लगाया।
अध्यक्ष बोले, नियम-67 को लेकर की जाएगी समीक्षा
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि 27 नवंबर 2025 को धर्मशाला के तपोवन में हुए शीत सत्र के दौरान व्यवस्था दी थी कि नियम-67 के तहत काम रोको प्रस्ताव पर फैसला प्रश्नकाल के बाद होगा। अब भविष्य के लिए इस फैसला की समीक्षा की जाएगी।