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Himachal Weather: बारिश से नदी-नाले उफान पर, गाड़ी फिसलने से दो की गई जान, प्रदेश में इतने दिन बरसेंगे बादल

Tue, 04 Aug 2026 08:02 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

पच्छाद में बारिश में गाड़ी फिसलने से दो लोगों की जान चली गई। नाथपा-झाकड़ी, कड़छम, जटौन बैराज के गेट खोलकर पानी छोड़ा गया और गानवी में घर पर चट्टान गिर गई।
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हिमाचल में बारिश से जगह-जगह नुकसान। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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भारी बारिश से हिमाचल प्रदेश में नदी-नाले उफान पर हैं। पच्छाद में बारिश में गाड़ी फिसलने से दो लोगों की जान चली गई। नाथपा-झाकड़ी, कड़छम, जटौन बैराज के गेट खोलकर पानी छोड़ा गया और गानवी में घर पर चट्टान गिर गई। मंगलवार सुबह सिरमौर जिला के डिंगरी सर्जेट गांव में बारिश के बीच कार फिसली। इसमें एक व्यक्ति घायल हुआ। शिमला में चलती बस पर पेड़ गिरा, जिससे सवारियां बाल-बाल बचीं। पेड़ जेसीबी से पेड़ हटाया गया। पांवटा-शिलाई और नाहन-कुमारहट्टी एनएच पर जगह-जगह भूस्खलन हुआ। पत्थर गिरने से आवाजाही बाधित हुई। लगातार बारिश से फसलों पर खतरा मंडरा रहा है।

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पांवटा उपमंडल में पांच और छह अगस्त को सभी शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे
मक्की और हरी सब्जियों में सड़न पैदा हो रही है। वहीं, भारी बारिश की चेतावनी के साथ पांवटा उपमंडल में पांच और छह अगस्त को सभी शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे। वहीं, बुधवार को कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिला में भारी बारिश होने का येलो अलर्ट जारी किया गया है। रामपुर खंड के दुर्गम क्षेत्र गानवी ग्राम पंचायत के पशगांव में भूस्खलन से एक घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। बहादुर सिंह के परिवार और पांच नेपाली मजदूरों ने भागकर जान बचाई। पशगांव में सुबह करीब 5:30 बजे कई सौ मीटर ऊंची पहाड़ी से बड़ी-बड़ी चट्टानें गिरीं। पहाड़ से गिरती चट्टानों की आवाज सुनकर घर में रह रहे बहादुर सिंह के परिवार के पांच सदस्य और पांच मजदूर सतर्क हो गए। वह समय रहते भाग कर सुरक्षित स्थान पर चले गए। इसी बीच पहाड़ी से गिरी बड़ी-बड़ी चट्टानों ने घर के एक कमरे और रसोई को पूरी तरह तोड़ दिया।

गाड़ी फिसलने से दो लोगों की मौत
सिरमौर जिला के पच्छाद में बारिश के बीच गाड़ी फिसलने से दो लोगों की मौत और एक महिला घायल हुई। जबकि भारी बारिश से विभिन्न विभागों को करीब 8.32 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। साथ ही एक मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने और एक गाय की मौत की भी सूचना है। कई सड़कें बंद हैं। वहीं, कटासन के समीप जलमूषा खड्ड में अचानक जलस्तर बढ़ने से चार गुर्जर परिवारों के 25 लोग बीच धारा में फंस गए। पुलिस, होमगार्ड, फायर ब्रिगेड और प्रशासन ने संयुक्त रूप से तीन घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान में सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। वहीं, लगातार बारिश के बीच गिरि जटोन बैराज से मंगलवार को दो चरणों में पानी छोड़े जाने पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने नदी किनारों और निचले क्षेत्रों में न जाने की चेतावनी जारी की। पिछले 24 घंटों में नाहन में 118 मिमी और ददाहू में 142 मिमी वर्षा दर्ज की गई।

सपड़ी-खुंडियां-पालमपुर मार्ग पर दरकी पहाड़ी
कांगड़ा जिले में मंगलवार को कई क्षेत्रों में बादल छाए रहे। वहीं, इंदौरा, पालमपुर में बारिश भी हुई। जिला मुख्यालय धर्मशाला में सुबह से बादल छाए रहने के साथ दोपहर को कुछ समय के लिए घनी धुंध छाई रही। जिले में अधिक बारिश न होने के चलते बिजली बोर्ड का कोई ट्रांसफर प्रभावित नहीं हुआ है और न ही जल शक्ति विभाग की कोई भी पेयजल योजना बाधित हुई है। लोक निर्माण विभाग के देहरा सर्कल के तहत ज्वालामुखी से सपड़ी-खुंडियां-पालमपुर मार्ग पहाड़ी से बढ़ी चट्टान गिरने के कारण 10:30 बजे के करीब बंद हो गया। मार्ग शाम पांच बजे तक बहाल नहीं हो पाया था। इस दौरान दो पहिया वाहनों सहित चार पहिया वाहनों को बग्गी-कोके-गुम्मर मार्ग से गुजरना पड़ा। रोहतांग समेत कई क्षेत्रों में सुबह से बादल छाए रहे। जिला मुख्यालय कुल्लू में दोपहर बाद हल्की बारिश हुई है, जिससे लोगों ने गर्मी से राहत महसूस की है। हाल ही में हुई बारिश से उपमंडल कुल्लू में दो सड़कें भुंतर-बिउंस भाई-भूलंग और कुल्लू-बढ़ई-बागन-पीज और उपमंडल बंजार में नगलाड़ी-शरची सड़क वाहनों की आवाजाही के लिए बंद है।

चंबा में पांच सड़कें बाधित
चंबा में मंगलवार को तेज धूप खिली रही। चिलचिलाती धूप के बीच दोपहर के समय कम लोग ही चंबा चौगान में खरीदारी करने के लिए पहुंचे। चंबा में पांच सड़कें, एक ट्रांसफार्मर और दो पेयजल योजनाएं बाधित हैं। ऊना जिले में मंगलवार को सुबह के समय कई स्थानों पर हल्की बारिश हुई। इससे उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली। दोपहर के समय हल्की बारिश से एक बार फिर उमस भरी गर्मी से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। मंडी जिले के कुछ क्षेत्रों में मंगलवार को हल्की बारिश हुई। हमीरपुर में मौसम का मिजाज बदलता रहा। सुबह के समय कई इलाकों में बारिश हुई, जिसके बाद दिनभर हल्की बूंदाबांदी और धूप के बीच मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दोपहर के समय कुछ देर के लिए धूप खिली, जिससे लोगों को राहत मिली। हालांकि शाम होते-होते एक बार फिर आसमान में बादल छा गए। मौसम में बदलाव के चलते लोगों को उमस और ठंड दोनों का अहसास हुआ। पेयजल योजनाएं सामान्य रूप से संचालित हैं। सभी मार्ग आवाजाही के लिए खुले हैं।

रेणुका में सर्वाधिक 142.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज
प्रदेश में बीते 24 घंटों के दौरान रेणुका में सर्वाधिक 142.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। नैना देवी में 140.8, नाहन में 117.6, ऊना में 57.0, कसौली में 38.0, राजगढ़ में 25.0, पांवटा साहिब में 22.6, नालागढ़ में 20.0, मंडी में 3.4 और कुफरी में 0.5 मिलीमीटर वर्षा हुई।

शिमला में न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस
शिमला में न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुंदरनगर में 22.9, भुंतर में 19.8, कल्पा में 14.2, धर्मशाला में 22.2, ऊना में 22.4, केलांग में 13.0, पालमपुर में 20.0, मनाली में 19.4, कांगड़ा में 24.0, हमीरपुर में 23.8, चंबा में 22.7, पांवटा साहिब में 26.0 और कुफरी में 15.7 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहा।

कुफरी में 20.0 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रहा
 अधिकतम तापमान की बात करें तो शिमला में 24.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुंदरनगर में 28.8, भुंतर में 30.6, कल्पा में 21.4, धर्मशाला में 29.0, ऊना में 30.4, नाहन में 27.0, केलांग में 26.2, मनाली में 24.8, कांगड़ा में 29.6, मंडी में 30.2, हमीरपुर में 32.0 और कुफरी में 20.0 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रहा।
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गोबिंद सागर से हटेगी 100 एमसीएम गाद
भाखड़ा बांध की जल भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए गोबिंद सागर जलाशय से बड़े स्तर पर गाद हटाने की तैयारी शुरू हो गई है। सांसद अनुराग सिंह ठाकुर के लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने बताया कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने बिलासपुर के लुहणू ग्राउंड और सीर खड्ड क्षेत्र में 10 वर्षों के दौरान 100 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) गाद हटाने की पायलट परियोजना शुरू की है। मंत्रालय के अनुसार परियोजना को राजस्व सृजन मॉडल के तहत प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया से लागू किया जा रहा है। चयनित एजेंसी निकाली गई गाद का व्यावसायिक उपयोग कर सकेगी, जबकि हिमाचल प्रदेश सरकार को रॉयल्टी, कर, शुल्क और अन्य वैधानिक देय राशि मिलेगी। मंत्रालय ने बताया कि मार्च और अप्रैल 2026 में जारी शुरुआती निविदाएं पात्र बोलीदाता नहीं मिलने के कारण रद्द करनी पड़ी थीं। इसके बाद सीर खड्ड की निविदा में संशोधन कर दोबारा प्रक्रिया शुरू की गई और 23 जुलाई 2026 को तीन कंपनियों की वित्तीय बोलियां खोली गईं। आवश्यक स्वीकृतियों के बाद डी-सिल्टेशन का कार्य शुरू होगा। उन्होंने बताया कि भाखड़ा और पौंग बांध के लिए अलग अवसाद प्रबंधन नीति नहीं बनाई गई है। बीबीएमबी राष्ट्रीय अवसाद प्रबंधन रूपरेखा के तहत कार्य कर रहा है। डीआरआईपी फेज-2 और फेज-3 के तहत भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) जलग्रहण क्षेत्र में भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और गाद के स्रोतों का वैज्ञानिक अध्ययन करेगा।
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