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Himachal Pradesh: तंबाकू के सेवन से युवाओं के खराब हो रहे हैं दांत, कैंसर का खतरा; 98% रोगियों में पुरुष शामिल

Sun, 13 Jul 2025 12:57 PM IST
अंकेश डोगरा हर्षित शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला

सार

हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार, धूम्रपान और तंबाकू के सेवन से मसूड़ों की पकड़ ढीली पड़ रही है और दांत खराब हो रहे हैं। आईजीएमसी में स्थापित टोबैको केयर सेंटर में छह महीनों में आए रोगियों में 98 प्रतिशत पुरुष और केवल 2 प्रतिशत महिलाएं थीं। पढ़ें पूरी खबर...
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में दांतों और मसूड़ों से जुड़ी बीमारियां स्वास्थ्य के लिए खतरा बनती जा रही हैं। पहले यह समस्याएं अधिकतर बुजुर्गों तक सीमित थीं लेकिन अब युवा और अधेड़ भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार, तंबाकू, गुटखा, सिगरेट और शराब की आदतें इसका प्रमुख कारण बन रही हैं।

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धूम्रपान और तंबाकू के सेवन से मसूड़ों की पकड़ ढीली पड़ रही है और दांत खराब हो रहे हैं। राजकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल शिमला (आईजीएमसी) में स्थापित टोबैको केयर सेंटर में छह महीनों में 538 लोग उपचार के लिए आए थे जिनके दांत धूम्रपान और तंबाकू से खराब हुए हैं। इनमें से 60.6 प्रतिशत मरीज 50 वर्ष से कम आयु के थे जबकि शेष 39.4 प्रतिशत की उम्र 50 साल से अधिक थी। 60 प्रतिशत रोगी शहरी क्षेत्रों से थे और 40 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों से आए थे। इनमें से 98 प्रतिशत पुरुष और केवल 2 प्रतिशत महिलाएं थीं। इसमें 95.8 प्रतिशत मरीज ऐसे थे जो धूम्रपान करते थे और 4.2 प्रतिशत तंबाकू चबाने वाले थे।

राजकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल शिमला के प्रधानाचार्य डॉ. आशु गुप्ता ने लोगों से आग्रह किया कि तंबाकू जैसी चीजों से जितना दूर रहें उतना ही बेहतर है। कहा कि डेंटल कॉलेज में स्थापित टोबैको केयर सेंटर में लोगों को सुविधा पहुंचाई जा रही है और डेंटल कॉलेज का स्टाफ लोगों से नशा छुड़ाने के लिए तत्पर है। शराब पीने वालों के मुंह का पीएच स्तर अम्लीय हो जाता है, जिससे हानिकारक बैक्टीरिया पनपते हैं। इससे कैविटी, मसूड़ों की सूजन और मुंह से दुर्गंध की समस्या बढ़ती है। शराब पीने से लार का उत्पादन कम होता है, जिससे मुंह सूखता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा शराब का सेवन ओरल कैंसर का भी एक प्रमुख कारण माना गया है। उन्होंने कहा कि लोगों को दांतों का विशेष ध्यान रखन चाहिए। तंबाकू आदि का पदार्थ का सेवन न करें, ब्रश हल्के हाथों से करें और हर व्यायाम करें।

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धूम्रपान से दांत होते हैं कमजोर, कैंसर का खतरा 
सिगरेट और बीड़ी का धुआं मसूड़ों तथा दांतों की जड़ों को प्रभावित करता है। यह मुंह के भीतर रक्त प्रवाह को घटा देता है जिससे मसूड़े कमजोर हो जाते हैं और दांतों की पकड़ ढीली पड़ने लगती है। लंबे समय तक धूम्रपान करने से पेरियोडोंटाइटिस बीमारी हो सकती है जिसमें मसूड़े सड़ने लगते हैं। इसके अलावा दांतों पर टार (एक गाढ़ा, चिपचिपा, काला पदार्थ) की परत जम जाती है जिससे उनका रंग पीला या काला हो जाता है।

धूम्रपान करने वालों को मुंह से दुर्गंध, छाले और मुंह के घाव जैसी समस्याएं भी होती हैं। तंबाकू या गुटखा चबाने से सबसे पहले दांतों की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचता है। इससे दांत संवेदनशील हो जाते हैं और कैविटी बनने लगती है। लगातार गुटखा चबाने से मुंह की झिल्ली में सख्ती (फाइब्रोसिस) आ जाती है, जिससे व्यक्ति को मुंह खोलने में तकलीफ होती है। मसूड़े सिकुड़ने लगते हैं और धीरे-धीरे दांत हिलने लगते हैं। यह स्थिति ओरल कैंसर का प्रारंभिक लक्षण हो सकती है। कई मामलों में मसूड़ों में सफेद या लाल चकत्ते भी दिखते हैं जो कैंसर के पूर्व संकेत होते हैं।
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