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हिमाचल: काम का दबाव घटाने के लिए सरकारी स्कूलों में शिक्षकों ने खुद ही रख लिए प्री-प्राइमरी टीचर, जानें मामला

Thu, 16 Jul 2026 05:10 AM IST
Krishan Singh विकास चौधरी, संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना।

सार

 अतिरिक्त जिम्मेदारी के इस बोझ को दूर करने के लिए प्राथमिक शिक्षकों ने अब अपने स्तर पर ही प्री-प्राइमरी टीचर नियुक्त कर दिए हैं। इन्हें ये शिक्षक अपनी जेब से 2500 से 3000 रुपये मासिक मानदेय दे रहे हैं। 
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शिक्षक(सांकेतिक)। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में प्री-प्राइमरी के लिए अलग से टीचर की नियुक्ति नहीं होने पर इन कक्षाओं का जिम्मा भी नियमित प्राइमरी शिक्षकों को सौंपा गया है। अतिरिक्त जिम्मेदारी के इस बोझ को दूर करने के लिए प्राथमिक शिक्षकों ने अब अपने स्तर पर ही प्री-प्राइमरी टीचर नियुक्त कर दिए हैं। इन्हें ये शिक्षक अपनी जेब से 2500 से 3000 रुपये मासिक मानदेय दे रहे हैं। प्राथमिक शिक्षक संघ ऊना का दावा है कि जिला में ही ऐसे 400 प्री प्राइमरी टीचरों को नियमित शिक्षक खुद से पैसा दे रहे हैं।

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ऊना के पांचों शिक्षा खंडों में ऐसे चल रहा प्री-प्राइमरी कक्षाओं का संचालन
ऊना जिले के पांचों शिक्षा खंडों के अधिकांश सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं का संचालन ऐसे ही चल रहा है। संघ के अनुसार प्रदेश सरकार ने प्री-प्राइमरी कक्षाएं तो शुरू कर दीं, लेकिन इनके लिए शिक्षक नियुक्त नहीं किए। ऐसे में पहली से पांचवीं कक्षा तक पढ़ाने वाले शिक्षकों पर प्री-प्राइमरी बच्चों की जिम्मेदारी भी आ गई। शिक्षकों का कहना है कि तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को गतिविधि आधारित शिक्षा, व्यक्तिगत देखभाल और अधिक समय की आवश्यकता होती है।

प्राथमिक शिक्षकों ने ये कहा
दूसरी कक्षाओं में पढ़ाने के साथ यह जिम्मेदारी आसान नहीं थी। इसी कारण शिक्षकों ने आपसी सहयोग से स्थानीय स्तर पर युवतियों को प्री-प्राइमरी कक्षाओं के संचालन के लिए रखा है। शिक्षकों के अनुसार यदि यह व्यवस्था नहीं की जाती तो प्री-प्राइमरी कक्षाओं का संचालन प्रभावित होता और बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में करवाने लगते। प्राथमिक शिक्षक कुलदीप कंग, राकेश चंद्र शर्मा, राजकुमार, शिव कुमार, वीरेंद्र राणा, शोभा गुलेरिया, पूजा कंवर और दर्शन शर्मा का कहना है कि यह व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल सकती। सरकार को जल्द शिक्षक नियुक्त करने चाहिए। जिले के प्राथमिक विद्यालयों में जेबीटी अध्यापकों के 100 से अधिक पद रिक्त हैं, जबकि प्री-प्राइमरी के लिए 300 शिक्षकों की जरूरत है। जिले के 50 सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन पर्याप्त शिक्षक न होने से कक्षाओं के संचालन और बच्चों की शुरुआती शिक्षा पर असर पड़ने की आशंका है।
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क्या बोले शिक्षा निदेशक

जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष संदेश कुमार ने कहा कि संघ ने अपने स्तर पर प्री-प्राइमरी कक्षाओं के संचालन, नौनिहालों की बेहतर शुरुआती शिक्षा और छात्र संख्या बढ़ाने के लिए 400 शिक्षकों की व्यवस्था की है। हालांकि, एसएमसी और शिक्षा विभाग से स्पष्ट निर्देश जारी नहीं हुए हैं। 

जिले के कई प्राथमिक स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं के लिए शिक्षकों की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर की गई है। इस समस्या की जानकारी विभाग के संज्ञान में है, लेकिन इसका समाधान तभी संभव है जब सरकार नियमित नियुक्तियां करे - सोमलाल धीमान, जिला प्राथमिक शिक्षा उपनिदेशक


शिक्षक अपने स्तर पर किसी भी प्रकार की भर्तियां करने के लिए अधिकृत नहीं हैं। जिला ऊना में हुई भर्तियों के मामले में शिक्षा उपनिदेशक से रिपोर्ट मांगी जाएगी।- आशीष कोहली, स्कूल शिक्षा निदेशक

 
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