बरोट स्थित शानन विद्युत परियोजना की रेजरवायर।
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मंडी-कांगड़ा जिलों की सीमा से सटे थमसर ग्लेशियर के जमने से बरोट स्थित शानन परियोजना की 16.8 मिलियन क्यूसिक की दो रेजरवायर में अचानक 50 फीसदी पानी की गिरावट हो गई है। इससे जोगिंद्रनगर में दो महत्वाकांक्षी पन विद्युत परियोजनाओं में विद्युत उत्पादन 40 प्रतिशत लुढ़क गया है। हिमाचल और पंजाब राज्यों की दो विद्युत परियोजनाओं को रोजाना लाखों रुपये की चपत लग रही है।
अक्तूबर माह में ही विद्युत उत्पादन अचानक कम होने से सर्द मौसम में हिमाचल, पंजाब राज्य में बिजली संकट गहराने की आशंका प्रबल हो गई है। सालाना 250 करोड़ रुपये की आमदनी जुटाने वाली पंजाब राज्य विद्युत बोर्ड की शानन स्थित पन विद्युत परियोजना में विद्युत उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत की गिरावट आई है। यहां 15 मेगावाट की चार और 50 मेगवाट की एक मशीन से 110 मेगावाट विद्युत उत्पादन होता था, लेकिन इन दिनों बड़ी मुश्किल से 66 मेगावाट ही विद्युत उत्पादन हो रहा है। सितंबर माह में विद्युत उत्पादन 85 और अगस्त माह में 100 मेगावाट से अधिक हो रहा था।
वहीं, हिमाचल राज्य की 66 मेगावाट बस्सी विद्युत परियोजना में भी विद्युत उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। यहां पर पानी की प्रचुर मात्रा में सितंबर माह तक 66 मेगावाट विद्युत उत्पादन हो रहा था जो अब 40 मेगावाट तक सिमट चुका है।
थमसर ग्लेशियर जम जाने से बरोट स्थित परियोजना की रेजरवायर में पानी की घटने से विद्युत उत्पादन में कुछ गिरावट आई है। तय लक्ष्य को फिर भी पूरा किया जा रहा है। -
भूपेंद्र सिंह, एसई शानन परियोजना
66 मेगावाट विद्युत उत्पादन की क्षमता वाली बस्सी परियोजना में इन दिनों 40 मेगावाट विद्युत उत्पादन ही हो पा रहा है। -
दिप्ती भट्ट, आरई बस्सी परियोजना जोगिंद्रनगर