एनजीटी नई दिल्ली के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल व विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की ओर से 24 अक्तूबर को इस मामले में सुनवाई की गई। पूरे मामले को लेकर सरकार एवं उच्चाधिकारियों को एनजीटी नई दिल्ली में चुनौती शिकायतकर्ता ऊना के नजदीकी गांव कोटला कलां निवासी मनोज कौशल ने दी है। 24 अक्तूबर को हुई सुनवाई में शिकायतकर्ता मनोज कौशल वर्चुअल माध्यम से जुड़े, जबकि विभागों की ओर से एडवोकेट जनरल राज कुमार, अनूप रत्न, अधिवक्ता राज कुमार और प्रिंसिपल सेक्रेटरी उद्योग आरडी नजीम और वन विभाग के प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर डॉ. पवनेश कुमार ने वर्चुअल व हिमाचल प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से वैभव श्रीवास्तव एएजी, विनीता तिवारी और राजनंदनी कुमारी बतौर अधिवक्ता प्रस्तुत हुईं।
'उद्योगों को नोटिस देने को कहा है'
मामले में बीते माह हुई सुनवाई में मांगे गए जवाब की पैरवी हुई। एनजीटी नई दिल्ली के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल व विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की ओर सुनवाई में सामने आया कि पंडोगा में डिस्टलरी, एसिड एवं केमिकल उद्योग लगाने की अनुमति नहीं है, तो यह कैसे स्थापित हो गए। मनोज कौशल ने बताया कि एनजीटी ने अधिकारियों को इन उद्योगों को नोटिस देने को कहा है और जवाब मांगा है।