अदालत को बताया गया कि साइट चयन समिति की रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार के प्रतिनिधियों का मानना था कि विश्वविद्यालय का मुख्यालय देहरा में होना चाहिए, जबकि केंद्रीय प्रतिनिधियों का मानना था कि विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपस्थिति की आवश्यकता के अनुरूप मुख्यालय धर्मशाला में होना चाहिए। 23 अप्रैल, 2010 के पत्र के तहत विश्वविद्यालय का अस्थायी परिसर या तो रीजनल सेंटर एचपी लॉ कॉलेज में शुरू किया जाएगा या फिर राज्य सरकार उपकुलपति के साथ विचार-विमर्श कर जगह चयनित करे। उसके बाद देहरा व धर्मशाला में दो अलग-अलग परिसर स्थापित किए गए।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि धर्मशाला में परिसर की स्थापना पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस विश्वविद्यालय के परिसर बनाने में राजनीति हो रही है। गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वर्ष 2007 में केंद्रीय विश्वविद्यालय को बनाने की घोषणा की थी। विवि के लिए देहरा में दक्षिण परिसर एवं धर्मशाला के पास जदरांगल में उत्तरी परिसर बनाया जाना प्रस्तावित है। देहरा कैंपस में 115 हेक्टेयर भूमि औपचारिकताएं पूरी करने के बाद निर्माण के लिए विवि को हस्तांतरित कर दी गई है। यहां कैंपस का निर्माण 70 फीसदी हो चुका है। अगला शैक्षणिक सत्र इसी परिसर में शुरू होने की संभावना है, लेकिन धर्मशाला को लेकर स्थिति जस की तस बनी हुई है। मौजूदा समय में केंद्रीय विश्वविद्यालय तीन अलग-अलग परिसरों धर्मशाला, शाहपुर और देहरा से संचालित हो रहा है।