उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में जिला चंबा के गांव मोटला में मलबे को हटाने के संबंध में याचिकाकर्ता संजीवन सिंह ने एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें मोटला से सुखीयार तक 9 किलोमीटर लंबी लिंक रोड के निर्माण के दौरान मलबे को अनुचित तरीके से डंप करने का मुद्दा उठाया गया था। यह काम प्रतिवादी ठेकेदारों की ओर से किया जा रहा था। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कई निर्देश जारी किए। जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण, चंबा के सचिव को साइट का निरीक्षण करने के लिए कहा गया, जबकि एसडीएम, भटियात से इस बात पर एक हलफनामा मांगा गया कि क्या मलबे को हटाने के लिए मांगे गए 92,96,440 रुपये की राशि जारी की गई है या नहीं।
न्यायालय ने यह भी पाया कि पांच नामित डंपिंग साइट्स नालों के जलग्रहण क्षेत्रों में स्थित थीं जिससे वे अवरुद्ध हो गए थे। ठेकेदार पर लगाया गया नाममात्र का जुर्माना भी अदालत को रास नहीं आया, जिसने बाद में 11,39,310 रुपये का जुर्माना लगाया। इसके अलावा, एक अतिरिक्त 9,12,630 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया और यह भी पाया गया कि जंगल की जमीन से मलबा हटाने की लागत 64 लाख रुपये थी।
ये भी पढ़ें- Himachal Pradesh : चलती कार के सनरूफ से बाहर निकलना पड़ेगा भारी, हिमाचल प्रदेश पुलिस करेगी चालान; जानें