मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने भविष्य में नियमों की सख्त अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को स्टोन क्रशर इकाइयों का निरीक्षण मासिक आधार पर करने को कहा है। इसके साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को प्रत्येक चार महीने में क्रशर परिसर का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने जनहित याचिका का निपटारा करते हुए यह निर्देश दिए है। हंदूर पर्यावरण मित्र संस्था की ओर से यह जनहित याचिका दायर की गई थी। इसमें नालागढ़ में अवैध खनन, सरकारी भूमि पर अतिक्रमण और स्टोन क्रशर इकाइयों द्वारा प्रभावी अनुमति के बिना संचालन को चुनौती दी गई थी। अदालत ने याचिकाकर्ता को भविष्य में किसी भी उल्लंघन की स्थिति में याचिका को फिर से दायर करने की स्वतंत्रता दी गई है। कोर्ट को बताया गया कि आठ स्टोन क्रशर इकाइयों से कुल 75,25,800 की पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि वसूली गई। दो इकाइयों को कमियां दूर करने के बाद जुर्माना भरकर संचालन की अनुमति दी गई।
पुलिस अधीक्षक बद्दी की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि 31 जुलाई 2025 तक 51 एफआईआर (अवैध खनन के लिए) दर्ज की गईं। 19 मामले अभी विचाराधीन हैं, जबकि 32 कोर्ट भेजे जा चुके हैं। अवैध खनन में शामिल 30 जेसीबी, 44 टिप्पर, 7 ट्रैक्टर और 2 कारों सहित कई वाहनों को जब्त किया गया।