कोर्ट ने पाया कि पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता वाले पुलिस स्थापना बोर्ड ने कभी भी याचिकाकर्ता के तबादले की सिफारिश नहीं की थी, जो अधिनियम की धारा 56 के तहत आवश्यक है। अदालत ने कहा कि तबादला हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम 2012 के वैधानिक प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए राजनीतिक हस्तक्षेप को खारिज किया।
अदालत ने कहा कि जब तक पुलिस स्थापना बोर्ड की ओर से सिफारिश नहीं की जाती, तब तक किसी भी पुलिस अधिकारी का तबादला सक्षम प्राधिकारी की ओर से नहीं किया जा सकता। अदालत ने याचिकाकर्ता की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्हें 24 दिसंबर 2024 को बैजनाथ से पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय डरोह स्थानांतरित करने के आदेश को चुनौती दी गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि यह तबादला नीति का उल्लंघन है और एक स्थानीय विधायक के बेटे के खिलाफ चालान जारी करने के बाद राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण किया गया है।
उन्होंने तर्क दिया कि पुलिस अधिनियम 2012 की धारा 56 के तहत सीडीपीओ का न्यूनतम कार्यकाल 2 साल होता है। यदि इस अवधि से पहले तबादला होता है तो अधिनियम के तहत लिखित में कारण दर्ज किए जाने चाहिए। धारा 56 के अनुसार पुलिस अधिकारियों के तबादले की सिफारिश केवल पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता वाली पुलिस स्थापना समिति की ओर से की जाती है। तबादला के समय इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है।