यह अत्याधुनिक तकनीक रेडिएशन थेरेपी के दौरान मरीज की हर हलचल पर नजर रखती है और जरूरत पड़ने पर मशीन को अपने-आप रोक देती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, एसजीआरटी सिस्टम की अनुमानित कीमत करीब ढाई से तीन करोड़ रुपये के बीच है। इस मशीन के आने से एम्स बिलासपुर उन चुनिंदा संस्थानों में शामिल हो जाएगा, जहां रेडिएशन थैरेपी की यह आधुनिक सुविधा उपलब्ध होगी। एम्स की ओर से जारी बिड के अनुसार इस उपकरण की एक यूनिट खरीदी जाएगी। बिड के तहत केवल मशीन की आपूर्ति ही नहीं, बल्कि उसकी स्थापना, परीक्षण, कमीशनिंग और रेडिएशन मशीन से इंटीग्रेशन भी शामिल है।
शरीर पर निशान लगाने की जरूरत नही: इलाज के दौरान शरीर पर टैटू या स्याही के निशान लगाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे मरीज को मानसिक और शारीरिक राहत मिलती है। यह तकनीक खासतौर पर स्तन, फेफड़े, सिर-गर्दन और प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है।