अदालत ने कहा कि बी-1 परीक्षा की प्रासंगिकता और हेड कांस्टेबल के पद पर पदोन्नति के लिए इस पर विचार-विमर्श की आवश्यकता है। याचिका में बताया गया है कि यह परीक्षा लगभग सात साल के अंतराल के बाद आयोजित की जा रही है, जबकि स्टैंडिंग ऑर्डर के अनुसार इसे हर साल अगस्त में आयोजित किया जाना चाहिए था। पिछली बी-1 परीक्षा वर्ष 2017 में हुई थी। परीक्षा पहले 21 सितंबर और फिर 20 अक्टूबर को आयोजित किया जा रहा था लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इतने लंबे अंतराल के बाद परीक्षा होने से वे नुकसान में रहेंगे। चौबीस घंटे ड्यूटी करने वाले वरिष्ठ और अनुभवी पुलिस कर्मियों को अब उन नए अभ्यर्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी जो हाल ही में ग्रेजुएट हुए हैं और सिलेबस से बेहतर परिचित हैं। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने बताया कि कॉन्स्टेबल की एक बड़ी संख्या इस बी-1 परीक्षा को पास न कर पाने के कारण बिना पदोन्नति के ही रिटायर हो जाती है। पुलिस विभाग की अन्य विंग्स जैसे बैंड स्टाफ, फिंगर प्रिंट, डॉग स्क्वायड के कर्मचारियों को 3 से 4 पदोन्नतियां मिल जाती हैं। कोर्ट को बताया गया कि पुलिस विभाग ने 2013 में ही हेड कांस्टेबल के पद पर पदोन्नति के लिए बी-1 टेस्ट को खत्म करने और वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति देने की सिफारिश की थी। उधर, अदालत के आदेश के बाद पुलिस विभाग ने परीक्षा रद्द करते हुए सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को इस बारे में सूचित कर दिया है।