बुधवार को मुख्य सचिव संजय गुप्ता की अध्यक्षता में सचिवालय में बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में सरकारी स्कूलों में सामाजिक सहभागिता बढ़ाने और समुदाय को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि तिथि भोजन से न केवल बच्चों को पोषणयुक्त भोजन मिलेगा, बल्कि समाज और स्कूलों के बीच आपसी जुड़ाव भी मजबूत होगा। योजना में कोई भी इच्छुक व्यक्ति अपनी खुशियों को स्कूली बच्चों के साथ साझा कर सकेगा।
तिथि भोजन पूरी तरह मिड-डे मील नियमों के दायरे में ही होगा। भोजन स्कूल परिसर में ही मिड-डे मील वर्कर की ओर से तैयार किया जाएगा, ताकि गुणवत्ता और स्वच्छता से कोई समझौता न हो। बाहर से बना हुआ भोजन लाने की अनुमति नहीं होगी। इसके लिए इच्छुक व्यक्ति को संबंधित स्कूल की स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के पास आवेदन करना होगा। एसएमसी नियमानुसार तिथि, मेन्यू और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं को तय करेगी। शिक्षा विभाग की ओर से जल्द ही इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएंगे।
शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने बताया कि पहले भी यह योजना लागू थी, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। अब दोबारा इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए अभिभावकों, स्थानीय संस्थाओं और आम लोगों को प्रेरित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि तिथि भोजन जैसी पहल से सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ेगा, बच्चों में उत्साह आएगा। बैठक में शिक्षा सचिव राकेश कंवर भी मौजूद रहे।