शोध टीम में छह प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. पुष्पलता शर्मा सह आचार्य गणित विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला, डॉ. अजित कुमार, सहायक आचार्य गणित, सांयकालीन महाविद्यालय शिमला, डॉ. ज्ञान चंद राणा प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय धनेटा, डॉ. धनंजय यादव सहआचार्य गणित निजवा विश्वविद्यालय ओमान, डॉ. पंकज कुमार सहायक आचार्य केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला और डॉ. पंकज ठाकुर आचार्य इक्फाई विश्वविद्यालय सोलन शामिल हैं।
वैज्ञानिकों को भारतीय पेटेंट कार्यालय से डिजाइन नंबर 464670-001, क्लास 23-03 में दर्ज हुआ है। शोध टीम ने बताया कि थर्मल द्रव हीटर एक आधुनिक, ऊर्जा-दक्ष और सुरक्षित हीटिंग डिवाइस है, जो तरल पदार्थों को नियंत्रित और समान तापमान पर गर्म करने में सक्षम है। नैनो फ्लूइड तकनीक पर विकसित इस डिवाइस का उपयोग दवाओं, सैनिटाइजर और मेडिकल फ्लूइड को सुरक्षित तापमान पर रखने में मदद करता है और अस्पतालों में स्टरलाइजेशन प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाता है।
इसके अलावा यह उपकरण दूध, पेय पदार्थ और खाद्य सामग्री को गर्म करने में सक्षम है, जिससे खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को नई मजबूती मिलती है। यह छोटे उद्योगों, डेयरी यूनिट और एमएसएमई क्षेत्रों के लिए किफायती और टिकाऊ विकल्प सिद्ध हो सकता है। दूरदराज और सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में इसकी स्थापना सरल है, जिससे राहत शिविरों, मेडिकल कैंपों और फील्ड-ऑपरेशन में इसे तेज़ी से उपयोग में लाया जा सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक आने वाले वर्षों में उद्योग, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकती है।
यह उपलब्धि डॉ. पुष्पलता शर्मा के नेतृत्व में संभव हो सकी। यह हीटर नैनौ फ्लूइड का प्रयोग कर विकसित किया गया है, जो कि कम ऊर्जा की खपत करेगा और इसके प्रयोग से कार्बन उत्सर्जन कम होगा। टीम का लक्ष्य है कि यह नवाचार आम जनता तक पहुंचे और मानव जीवन को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और ऊर्जा-कुशल बनाए। -डॉ. ज्ञान चंद राणा, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय धनेटा