हिमाचल प्रदेश में फोरलेन-नेशनल हाईवे (एनएच) और अन्य सड़कों के किनारे की गई मलबे की अवैध डंपिंग की जांच होगी। कीरतपुर-मनाली फोरलेन निर्माण के दौरान डंप किया मलबा भारी बारिश होने पर ब्यास में बहकर आया था। इससे बाढ़ की स्थिति बनी और भारी जानमाल का नुकसान हुआ। अब ब्यास की ड्रेजिंग कर मलबा और गाद निकाली जाएगी, ताकि नदी का रास्ता साफ हो सके। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के कार्यों को देखने के लिए बनाई गई विशेष टास्क फोर्स की बैठक में यह फैसला लिया है। अमर उजाला ने कराहते पहाड़ अभियान के तहत अवैध डंपिंग के मामले को प्रमुखता से उठाया था।
मंगलवार को राज्य सचिवालय में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने एनएचएआई के अधिकारियों की बैठक बुलाई। इसमें अधिकारियों को अवैध डंपिंग करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए। कीरतपुर-मनाली फोरलेन निर्माण के दौरान पहाड़ों की कटिंग का मलबा ब्यास नदी के किनारों पर डंप किया गया। यह मलबा भारी बरसात में बहकर ब्यास नदी में चला गया। इससे पानी का स्तर नदी के तल से काफी ऊपर बढ़ गया। हालात यह हैं कि बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों के लिए खतरा बन गया। कई जगह इससे भारी तबाही हुई। गौरतलब है कि केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी फोरलेन के निर्माण पर उठाए थे। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि अधिकारी घरों में बैठकर डीपीआर तैयार कर रहे हैं।