न्यूजीलैंड से भारत में वार्षिक सेब आयात लगभग 31,392.6 टन है। न्यूजीलैंड में सेब की औसत पैदावार 53.6 टन प्रति हेक्टेयर और भारत में औसत 9.2 टन प्रति हेक्टेयर है। शुल्क में कटौती के बाद आयात दोगुना होने की संभावना है, जिसका नुकसान देश के सेब उत्पादकों को उठाना पड़ेगा। यही नहीं, न्यूजीलैंड से सेब एक अप्रैल से लेकर 31 अगस्त तक सीमित मात्रा में आएगा और आने वाले वर्षों में इसकी मात्रा बढ़ाई जाएगी। समझौते के अनुसार पहले पांच साल में न्यूजीलैंड को 32,500 टन सेब पर आयात शुल्क में छूट दी जाएगी। छठे साल में यह कोटा बढ़ाकर 45,000 टन कर दिया जाएगा।
सेब के अलावा कीवी और नाशपाती के बागवानों को भी ज्यादा नुकसान का अंदेशा है, क्योंकि एफटीए में कीवी पर आयात शुल्क खत्म करने और नाशपाती पर भी शुल्क घटाने का निर्णय लिया गया है। हिमाचल के किसान संगठनों का कहना है कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच एफटीए में सेब, कीवी और नाशपाती उत्पादकों के हितों की अनदेखी की गई है। अमेरिका भी भारत के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते में अपने सेब पर शुल्क में छूट की मांग कर रहा है। संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान का कहना है कि बागवानों के हित ताक पर रखकर समझौता किया गया है। वहीं, सेब उत्पादक संघ के समन्वयक संजय चौहान का कहना है कि शुल्क कटौती चिंताजनक है। सेब बागवान पहले ही बढ़ती लागत से संकट में हैं। विदेशों से सस्ता सेब आने पर सेब बागवानी बरबाद हो जाएगी।