हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से 13 फरवरी को जारी कर्मचारियों के स्थानांतरण से संबंधित कार्यालय आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। सरकार की ओर से 2013 की पॉलिसी में पैरा 22 ए को जोड़ा गया है। इसके तहत स्थानांतरित कर्मचारी को सीधे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के बजाय विभागीय अधिकारियों के पास मामला रखने को कहा गया है। उच्च न्यायालय में इसी आदेश के खिलाफ याचिका दायर की गई है। इस मामले की वीरवार को सुनवाई हो सकती है।
सरकार के इस आदेश में कहा गया है कि स्थानांतरित कर्मचारियों को पहले जारी आदेश की अनुपालना करनी होगी। कर्मचारी को जिस स्थान पर स्थानांतरित किया गया है, वह निर्धारित समय के अंदर अपना कार्यभार ग्रहण करें, जिससे सरकारी कार्य सुचारु रूप से चल सके। अगर कर्मचारी को लगे कि उसका तबादला गलत तरीके से किया गया है तो वह इसकी शिकायत विभाग के अधिकारी को करे। अधिकारी इसका 30 दिनों के भीतर निपटारा करे। सरकार की ओर से कहा गया है कि स्थानांतरण नीति वर्ष 2013 के दिशा-निर्देश में कर्मचारियों के स्थानांतरण के निवारण का कोई प्रावधान नहीं है। प्रशासनिक आवश्यकताओं और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए यह धारा जोड़ी गई है।
याचिका में कहा गया है कि यह एक स्थापित कानून है कि तबादला करने वाले अधिकारी उसी से संबंधित मामले की सुनवाई नहीं कर सकते हैं। किसी कर्मचारी को तत्काल ज्वाइनिंग के आदेश देना प्राकृतिक अधिकारों के खिलाफ है। इससे पहले यह प्रावधान रहा है कि अगर किसी कर्मचारी का तबादला हो जाता था तो वह सीधे न्यायालय का दरवाजा खटखटाता रहा है। हाईकोर्ट में ऐसे कई मामलों में स्टे मिलता रहा है।