पूर्व जल शक्ति मंत्री विद्या स्टोक्स के ओएसडी रहे बुद्धि राम जस्टा/शिकायत पत्र
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अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत रखी जाने वाली जिलास्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठकों में शामिल नहीं होने पर लोकसभा अध्यक्ष से शिमला के सांसद सुरेश कश्यप की शिकायत की गई है। इसके अलावा शिमला जिले के आठ विधायकों की भी विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया से शिकायत की गई है कि वे भी बैठकों में शामिल नहीं हुए। यह शिकायत जिलास्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति के गैर सरकारी सदस्य व पूर्व जल शक्ति मंत्री विद्या स्टोक्स के ओएसडी रहे बुद्धि राम जस्टा ने की है। जस्टा ने इस संबंध में आरटीआई एक्ट के तहत ली गई सूचना को भी शिकायत पत्रों के साथ संलग्न किया है। उन्होंने सांसद और विधायकों के बैठकों में शामिल करवाने के लिए आदेश जारी करने को कहा है।
आरटीआई एक्ट के तहत यह सूचना वर्ष 2020 से लेकर 2023 तक की ली गई है। इसके अलावा जस्टा ने यह भी स्पष्ट किया है कि 20 दिसंबर 2024 को भी बैठक में भी न तो सांसद और न ही इसमें विधायक ही शामिल हुए। यह उल्लेखनीय है कि शिमला जिला की 8 विधायकों में से तीन मंत्री हैं। जस्टा ने मंत्रियों की ओर से भी गंभीरता न दिखाए जाने पर अफसोस प्रकट किया है। विधायकों की बात करें तो इन बैठकों में केवल तत्कालीन विधायक राकेश सिंघा ही वर्ष 2021 और 2022 में शामिल हुए। इनके अलावा कोई भी जनप्रतिनिधि यानी कि सासद और विधायक पांच वर्ष में इन बैठकों में शामिल नहीं हुए।
बुद्धिराम जस्टा ने कहा है कि सांसद और विधायकों ने इन बैठकों में शामिल न होकर भारतीय संविधान की अवहेलना की है। वर्तमान में शिमला जिला के सांसद सुरेश कश्यप खुद अनुसूचित जाति से संबंध रखते हैं, मगर इससे उनकी गंभीरता भी सामने आती है कि वह अनुसूचित जाति के लोगों के अत्याचार निवारण को लेकर कितने सजग हैं। शिकायत पत्र में लिखा गया है कि हाशिये पर पड़े, दबे कुचले, अनुसूचित जाति जनजाति के समुदायों के हितों की रक्षा, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, राजनीतिक शोषण, अन्य और अत्याचारों से मुक्ति कैसे संभव हो पाएगी, जब तक कि कानूनी पाबंद यह निर्वाचित जनप्रतिनिधि जिलास्तरीय बैठकों की समस्या समाधान के लिए उपस्थित नहीं होंगे।