फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Himachal News: देव समाज ने रोपवे के विरोध में दिल्ली में रखा पक्ष, नड्डा अब मोदी से करेंगे बात

Mon, 03 Nov 2025 09:34 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू।

सार

सोमवार को देव समाज, बिजली महादेव रोपवे संघर्ष समिति और मंदिर कमेटी ने रोपवे पर अपना विरोध दर्ज कराया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के सामने देव समाज ने पक्ष रखा। पढ़ें पूरी खबर...
विज्ञापन
बिजली महादेव मंदिर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर बनी केंद्र की तीन सदस्यीय कमेटी के समक्ष दिल्ली में सोमवार को देव समाज, बिजली महादेव रोपवे संघर्ष समिति और मंदिर कमेटी ने रोपवे पर अपना विरोध दर्ज कराया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के सामने देव समाज ने पक्ष रखा। समिति ने देव आदेश, जगती में लिए फैसले और रोपवे से आस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का हवाला देते हुए विस्तृत फाइल सौंप दी है।

विज्ञापन

मंदिर कमेटी ने कहा कि देववाणी में रोपवे प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से नकार दिया गया है। यह भी बताया कि बिजली महादेव मंदिर के कपाट 15 दिसंबर से 15 मार्च तक बंद रहते हैं और इस अवधि में प्रवेश वर्जित होता है। रोपवे लगने से सालभर आवाजाही बढ़ने की आशंका है। इससे देव आस्था और परंपरागत व्यवस्था प्रभावित होगी। समिति ने यह भी उल्लेख किया कि मंदिर परिसर में कई गुप्त धार्मिक प्रक्रियाएं होती हैं, जिनका सम्मान सर्वोपरि है।

वहीं, संघर्ष समिति ने दोहराया कि देव आदेश सर्वमान्य और सर्वोपरि हैं। कई देवी-देवता गूर के माध्यम से पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि बिजली महादेव को आहत न किया जाए। पूर्व सांसद एवं भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने भी कमेटी के सामने जगती में आए आदेशों की व्याख्या रखी। दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के कार्यालय में हुई बैठक में महेश्वर सिंह की अगुवाई में सात सदस्यीय दल मौजूद रहा। अब तीन सदस्यीय कमेटी पूरी स्थिति प्रधानमंत्री को अवगत करवाएगी।
विज्ञापन

उल्लेखनीय है कि रोपवे का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। नग्गर की देव संसद (जगती) में भी देवताओं ने प्रस्ताव को पूरी तरह नकार दिया है। शिलान्यास के बाद रोपवे की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। परियोजना के लिए जंगल में 67 कायल के पेड़ काटे जा चुके हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें