मंदिर कमेटी ने कहा कि देववाणी में रोपवे प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से नकार दिया गया है। यह भी बताया कि बिजली महादेव मंदिर के कपाट 15 दिसंबर से 15 मार्च तक बंद रहते हैं और इस अवधि में प्रवेश वर्जित होता है। रोपवे लगने से सालभर आवाजाही बढ़ने की आशंका है। इससे देव आस्था और परंपरागत व्यवस्था प्रभावित होगी। समिति ने यह भी उल्लेख किया कि मंदिर परिसर में कई गुप्त धार्मिक प्रक्रियाएं होती हैं, जिनका सम्मान सर्वोपरि है।
वहीं, संघर्ष समिति ने दोहराया कि देव आदेश सर्वमान्य और सर्वोपरि हैं। कई देवी-देवता गूर के माध्यम से पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि बिजली महादेव को आहत न किया जाए। पूर्व सांसद एवं भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने भी कमेटी के सामने जगती में आए आदेशों की व्याख्या रखी। दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के कार्यालय में हुई बैठक में महेश्वर सिंह की अगुवाई में सात सदस्यीय दल मौजूद रहा। अब तीन सदस्यीय कमेटी पूरी स्थिति प्रधानमंत्री को अवगत करवाएगी।
उल्लेखनीय है कि रोपवे का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। नग्गर की देव संसद (जगती) में भी देवताओं ने प्रस्ताव को पूरी तरह नकार दिया है। शिलान्यास के बाद रोपवे की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। परियोजना के लिए जंगल में 67 कायल के पेड़ काटे जा चुके हैं।