फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Himachal Pradesh: 50 फीसदी बढ़े मशरूम के दाम, मशरूम सिटी सोलन में प्रति वर्ष फार्म बंद कर रहे छोटे किसान

Tue, 01 Apr 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन।

सार

हिमाचल प्रदेश की मशरूम सीटी सोलन में ही पांच हजार टन प्रति वर्ष कमी आ रही है। सोलन समेत अन्य चार जिलों मशरूम उत्पादन 60 फीसदी तक गिर गया है। पढ़ें पूरी खबर...
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : AI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मशरूम सिटी सोलन के उत्पादकों ने घाटा होने पर अपने मशरूम फार्म बंद करना शुरू कर दिया है। इसका असर अब मशरूम पर पड़ने लगा है। कम पैदावार होने से मशरूम के दाम भी 50 फीसदी बढ़ गए हैं। जहां पहले सीजन समय पर मशरूम 80 से 100 रुपये प्रति किलो आसानी से मिल जाती थी, अब वही मशरूम 150 और 200 रुपये प्रति किलो तक मिल रही है। बताया जा रहा है कि मशरूम को तैयार करने वाला कच्चा माल महंगा हो गया है। इसमें गेहूं का भूसा, बिजली, बीज शामिल है।

विज्ञापन

मशरूम सीटी सोलन में ही पांच हजार टन प्रति वर्ष कमी आ रही है। सोलन समेत अन्य चार जिलों मशरूम उत्पादन 60 फीसदी तक गिर गया है। इसमें मशरूम हब आठ वर्ष पहले करीब 10,000 टन उत्पादन होता था। वहीं, अब यह घट कर 3 से 4 हजार टन तक रह गया है। इसका मुख्य कारण अनुदान पर मशरूम खाद न मिलना भी बताया जा रहा है। पहले सोलन चंबाघाट स्थित कंपोस्ट यूनिट से किसानों को खाद मिल जाती थी, इस दौरान छोटे-बड़े उत्पादकों की संख्या भी काफी थी, लेकिन कालका-शिमला एनएच पर फोरलेन कार्य के दौरान उद्यान विभाग की 48 वर्ष पुराना यूनिट जद में आने से यहां पर खाद बनाने का कार्य भी रुक गया। इसके बाद अभी तक यहां पर दोबारा से यूनिट को स्थापित नहीं किया गया है। हालांकि यूनिट के लिए जगह तो चयनित की जा रही है, लेकिन इसका कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
 

95 प्रतिशत छोड़ चुके हैं मशरूम उगाना
मशरूम ग्रोवर एसोसिएशन जिला सोलन के प्रधान रत्न ठाकुर, संजय ठाकुर, परस राम, लक्ष्मी ठाकुर, केश्व शर्मा, प्रदीप शर्मा, महेंद्र ठाकुर समेत अन्य उत्पादकों ने बताया कि उद्यान विभाग की मशरूम कंपोस्ट इकाई फोरलेन के कारण उजड़ चुकी। लेकिन अभी तक प्रदेश सरकार और विभाग की ओर से इसे दोबारा से स्थापित नहीं किया। कई बार ग्रोवर अपनी मांग को लेकर पूर्व और वर्तमान सरकार के मंत्री समेत अन्य नेताओं से भी मिल चुके हैं। लेकिन अभी तक समस्या को कोई हल नहीं निकाला गया। मजबूरन ग्रोवरों को मशरूम उगाना छोड़ना पड़ रहा है। कई ग्रोवरों ने तो मशरूम फार्म तैयार करने के लिए बैंकों से ऋण भी लिया है, जिसकी किस्त देना भी उनके लिए अब मुश्किल हो गया है। 95 फीसदी छोटे ग्रोवरों ने मशरूम उगाना छोड़ दिया है।
 

निजी खाद यूनिट से खरीद पर मिले अनुदान
मशरूम ग्रोवर एसोसिएशन जिला सोलन के प्रधान रत्न ठाकुर ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि जल्द सोलन में मशरूम कंपोस्ट यूनिट शुरू किया जाए। तब तक निजी यूनिट से खाद खरीद पर अनुदान प्रदान किया जाए। वर्तमान में निजी यूनिट से 110 से 140 रुपये तक बैग पड़ रहा है, जोकि ग्रोवरों के लिए घटे का सौदा बना हुआ है। जबकि पहले अनुदान पर 90 रुपये में चार बैग मिलते थे।
विज्ञापन

इन जिलों पड़ रहा असर
वर्तमान में सोलन, सिरमौर, शिमला, किन्नौर और बिलासपुर जिला में खाद संकट के कारण कई ग्रोवरों ने मशरूम का कारोबार छोड़ दिया है। जहां पहले इन जिला में 8,000 से उत्पादक थे, अब इनकी संख्या मात्र करीब 1500 ही रह गई है। वर्तमान में कुछ बड़े ग्रोवर निजी या फिर रामपुर के दत्त नगर खाद यूनिट से गुजारा कर रहे हैं। यहां से भी सभी ग्रोवरों का पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें