8 सितंबर तक चलने वाले इस अभियान के तहत मोबाइल लाइब्रेरी प्रदेश के दस हजार प्राथमिक व मिडिल स्कूलों में जाएगी। इस दौरान सभी स्कूलों में बच्चों की उम्र के अनुसार किताबों का प्रदर्शन किया जाएगा और उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक दिन 15–20 मिनट का प्लेज रीडिंग टाइम होगा। सोमवार और शुक्रवार को रीड-अलाउड सेशन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें शिक्षक या विद्यार्थी कहानियां जोर से पढ़ेंगे और अन्य बच्चे उन्हें ध्यानपूर्वक सुनेंगे। शिक्षक, अभिभावकों और विद्यार्थियों को घर पर पढ़ने के लिए लिटरेसी क्लाउड से चुनी हुई कहानियों के लिंक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से भेजे जाएंगे।
ये लिंक रूम टू रीड इंडिया ट्रस्ट की ओर से उपलब्ध कराए जाएंगे। एक सितंबर को रीड-ए-थॉन कार्यक्रम के तहत ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड गतिविधि आयोजित होगी, जिसमें सभी विद्यार्थी और शिक्षक एक ही समय पर किताबें पढ़ेंगे। इसके अतिरिक्त माई बुक माई स्टोरी अभियान के तहत बच्चों के जीवन पर पढ़ाई और बुनियादी साक्षरता के सकारात्मक असर को दर्शाने वाली तीन छोटी कहानियों के वीडियो भी बनाए जाएंगे, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली में प्रदर्शित किया जाएगा। यह अभियान 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर संपन्न होगा।
समापन अवसर पर स्कूलों में विशेष कार्यक्रम होंगे, जिनमें पढ़ाई के महत्व पर चर्चा की जाएगी और सबसे अधिक किताबें पढ़ने वाले तथा नियमित रूप से लाइब्रेरी का उपयोग करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि माई बुक माई स्टोरी अभियान का मूल उद्देश्य बच्चों में किताबें पढ़ने की आदत को पुनर्जीवित करना है। यह चिंता का विषय है कि समय के साथ बच्चों की किताबों में रुचि कम होती जा रही है। आज शिक्षा में डिजिटल गैजेट्स का प्रयोग तेजी से बढ़ा है, लेकिन किताबों का महत्व और उनका अनुभव किसी भी आधुनिक तकनीक या गैजेट से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता।