चार परिवारों वाला गांव रोशनी में नहाया तो बच्चों की तालियां दूर तक गूंज उठीं। बुजुर्ग चुपचाप खड़े रहे। आंसू छलकते रहे और चेहरे पर ऐसी राहत थी जो शब्दों में नहीं उतर सकती। गांव तक सड़क आज भी नहीं है।
खड़ी चढ़ाई और पगडंडियों से होते हुए शैंशर से करीब चार किलोमीटर दूर बिजली के दस खंभे ढोकर लगाए गए। गांव में सिर्फ बिजली ही नहीं आई। मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट भी पहली बार पहुंचे। युवाओं ने वीडियो कॉल की कोशिश की तो बुजुर्गों ने बस यही कहा अगर यह पहले आता, तो हमारी कई मुश्किलें कम हो जातीं। अब गांव बदलेगा। जिंदगी बदलेगी। बच्चे रात में पढ़ सकेंगे। महिलाएं सुरक्षित तरीके से काम निपटा पाएंगी।
बिना बिजली के हर छोटा-बड़ा काम सूरज की गति पर निर्भर था। अगर कोई काम शाम तक रह जाए, तो अगले दिन का इंतजार करना पड़ता था। रातें सिर्फ अंधेरा, सावधानी और असुविधा लेकर आती थीं।
- फूला देवी
देश मशीनों के युग में था और हम मोमबत्ती में जिंदगी ढूंढ रहे थे। किसी के बीमार होने पर बस भगवान ही मालिक था।-
चैनू राम
परीक्षा के दिनों में दिक्कत और बढ़ जाती थी। बच्चे अंधेरा होने तक घर पहुंचते थे, और फिर दोबारा पढ़ना संभव ही नहीं था।
- टेक चंद