राजस्व और बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी (File Photo)
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देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी विकास के लिए शुरू की गए बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम (बीएडीपी) का नाम वाइब्रेंट विलेज बदलकर केंद्र सरकार ने हिमाचल के साथ धोखा किया है। बीएडीपी में हिमाचल के दो जिलों लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिले के लिए 239 गांवों का चयन किया गया था, वाइब्रेंट विलेज में इनकी संख्या घटाकर 75 कर दी गई है। राजस्व, बागवानी और जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने आरोप लगाते हुए कहा है कि 2022 में योजना का नाम बदलकर हिमाचल के साथ धोखा किया गया।
कहा कि किन्नौर जिले के दो ब्लॉक कल्पा और पूह पूरे के पूरे बीएडीपी याेजना में शामिल थे। प्रदेश ने करीब 1000 करोड़ की डीपीआर इस योजना के तहत केंद्र को भेजी थी लेकिन केंद्र से मदद नहीं मिली। गैप फंडिंग के तौर पर इस योजना के तहत सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाएं जैसे सड़कें, पेयजल, सिंचाई योजनाएं, स्कूल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जानी थीं। इतना ही नहीं, किन्नौर और लाहौल-स्पीति के लिए एंटी फ्रीजिंग स्कीम की घोषणा की गई थी, जिससे माइनस तापमान में भी लोगों के पेयजल उपलब्ध करवाया जा सके। किन्नौर के लिए 80 करोड़ और लाहौल-स्पीति के लिए 50 करोड़ की घोषणा हुई थी, लेकिन इस योजना में भी केंद्र ने अब तक कोई पैसा जारी नहीं किया है।